चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी ऑफलाइन और ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर असमंजस में हैं, क्योंकि दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षा आयोजित की जा सकती है। ऐसे में अगर अगले महीने तक सभी विभागों की ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होती हैं तो परीक्षा भी ऑफलाइन माध्यम में आयोजित करवाई जा सकती है। वहीं विद्यार्थी ऑनलाइन परीक्षा के पक्ष में हैं, क्योंकि आधे से ज्यादा सेमेस्टर की पढ़ाई ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से हुई है।
पीयू के शिक्षकों ने बताया कि उनकी कक्षाओं में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य लगभग सभी विद्यार्थियों का टीकाकरण हो चुका है। इसे लेकर विद्यार्थियों से डाटा भी इकट्ठा किया गया था और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। प्रथम वर्ष के अभी दाखिले चल रहे हैं, इसलिए उनकी कोई जानकारी नहीं है। कक्षाओं में विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाओं को लेकर सवाल करते हैं, लेकिन उनका पक्ष यह भी है कि अगर अभी यूनिवर्सिटी नहीं खुलती है तो फिर परीक्षा भी ऑनलाइन माध्यम में होनी चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफलाइन माध्यम में परीक्षा लेने पर उनके अंकों में गिरावट आ जाएगी।
क्या कहते हैं विद्यार्थी
स्कूल के साथ अगले हफ्ते से यूनिवर्सिटी भी खुले
चंडीगढ़ प्रशासन ने अगले हफ्ते से स्कूलों को पूरी क्षमता के साथ खोलने के निर्देश जारी कर दिए हैं। जब छोटे बच्चों की बिना वैक्सीन ही सामान्य तरीकेसे पढ़ाई शुरू हो रही है तो यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने तो टीकाकरण भी करवा रखा है। प्रोफेशनल डिग्री के कोर्स का ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि ऑनलाइन में व्यावहारिक पढ़ाई नहीं हो पाई है। - अमन, छात्रा, कानून
परीक्षा होनी चाहिए ऑनलाइन
पूरे सेमेस्टर की पढ़ाई ऑनलाइन हुई है, इसलिए परीक्षा भी ऑनलाइन होना चाहिए, क्योंकि अब अगर अगले महीने तक विभाग खुलते भी हैं तो विद्यार्थियों की उतने अच्छे से परीक्षा को लेकर तैयारी नहीं हो पाएगी। ऑनलाइन पढ़ाई की गुणवत्ता को देखते हुए विद्यार्थियों को डर है कि उनके अंक कम आएंगे। यूनिवर्सिटी प्रशासन फैसले लेने में काफी देरी कर रहा है। - निखिल, छात्र, एमटेक
कानून की इंटर्नशिप भी निकली ऑनलाइन :
ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे अधिक नुकसान प्रोफेशनल और प्रैक्टिकल पढ़ाई वाले विद्यार्थियों का हुआ है। हमारी कानून की इंटर्नशिप भी ऑनलाइन ही निकल गई। न तो कक्षाओं में मूट कोर्ट आयोजित हुई, जिससे वे व्यावहारिक ज्ञान ले सकते और ऑनलाइन इंटर्नशिप में भी कुछ सीखने को नहीं मिला। विद्यार्थियों के ऑनलाइन पढ़ाई में पिछले दो साल व्यर्थ हुए हैं। - कुदरत, छात्रा, कानून
अभी तक नहीं देखा विभाग
पिछले वर्ष एमए में दाखिला लिया था, लेकिन अभी तक विभाग और कक्षा नहीं देखी है। स्कूल के विद्यार्थी भी स्कूल जाने लगे हैं, बस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को ही कोरोना का डर है। ऑनलाइन पढ़ाई में कुछ भी समझ नहीं आता है। यहां तक कि कक्षा के विद्यार्थियों के साथ भी कोई खास जान-पहचान नहीं हुई है। महसूस ही नहीं हो रहा कि यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। - जसविंदर, छात्र, एमए