हरियाणा खेलकूद विश्वविद्यालय सोनीपत में प्रदेश के मूल निवासी विद्यार्थियों को दाखिलों में आरक्षण मिलेगा। विवि के कुलाधिपति राज्यपाल ही होंगे। सरकार किसी को भी कुलाधिपति नहीं लगा सकेगी। विधानसभा की प्रवर समिति ने हरियाणा खेलकूद विवि विधेयक-2021 में बदलाव के लिए अनेक सिफारिशें की हैं। बुधवार को समिति के चेयरपर्सन डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने रिपोर्ट बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में सदन पटल पर रख दी।
रिपोर्ट के अनुसार बदलाव कर सरकार नए सिरे से खेलकूद विधेयक को विधानसभा में लाएगी। जिसे चर्चा के बाद पारित किया जाएगा। 19 मार्च 2021 को सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए विधानसभा में लाई थी। विपक्षी दल कांग्रेस की अनेक आपत्तियों के कारण विधेयक पारित नहीं हो पाया था। जिस पर सरकार ने इसे प्रवर समिति को भेजा था। समिति ने तीन बैठकों के बाद सरकार को सुझाव दिया है कि खेलकूल विवि में कुलाधिपति कोई और नहीं प्रदेश के राज्यपाल ही होंगे। राज्यपाल अब विजिटर नहीं होंगे। विजिटर शब्द को ही विधेयक से हटाया जाएगा। विजिटर की जगह कुलाधिपति शब्द शामिल होगा।
विवि के ऑडिट व निरीक्षण के लिए सचिव या उससे ऊपरी स्तर के अधिकारियों व प्रख्यात व्यक्ति को ही नियुक्त किया जाएगा। प्रदेश के मूल निवासी विद्यार्थियों को दाखिला में आरक्षण मिलेगा। विवि में दाखिलों के समय अब प्रदेश के बच्चों को मूल निवासी प्रमाण पत्र जमा करवाना होगा। विधेयक-2021 में मूल निवासी प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिला में प्राथमिकता देने का कोई प्रावधान नहीं था। जिससे बच्चों को अन्य विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए दाखिला लेना पड़ता। कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने बीते वर्ष विधेयक के अनुभाग-6 में संशोधन सुझाया था। इसके जरिये ही अब मूल निवासी बच्चे दाखिला में आरक्षण पा सकेंगे।
समिति की सिफारिश अनुसार ये करने होंगे बदलाव
- रजिस्ट्रार को प्रोक्टर नहीं माना जाएगा। कुलपति की सहायता के लिए प्रोक्टर की नियुक्ति होगी
- विवि की ओर से कॉलेजों और संस्थानों को मान्यता दी जाएगी। सेंटर शब्द हटा दिया गया है
- विधेयक में यह लिखना होगा कि इसे दूसरी नहीं तीसरी बार विधानसभा में लाया जा रहा है। 2021 की जगह 2022 लिखा जाएगा।
- वीसी का कार्यकाल तीन साल व 65 वर्ष की आयु से अधिक नहीं होगा। एक व्यक्ति अधिकतम दो बार ही वीसी बन सकेगा
- विधि पराममर्शी व विधि एवं विधायी विभाग के प्रशासनिक सचिव विधेयक का नया ड्राफ्ट प्रवर समिति व प्रशासनिक विभाग से चर्चा के बाद तैयार करेंगे
दो फरवरी 2022 को हुई समिति की अंतिम बैठक
प्रवर समिति की अंतिम बैठक बीते दो फरवरी को ही हुई। इसमें विधेयक के संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में चेयरपर्सन रणबीर गंगवा, खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह, विधायक जगबीर मलिक, गीता भुक्कल, असीम गोयल, भारत भूषण बत्रा, मोहन लाल बड़ोली के अलावा खेल विभाग के उस समय प्रधान सचिव अपूर्व कुमार सिंह, वर्तमान निदेशक पंकज नैन, संयुक्त निदेशक सुमिता शर्मा, विधि एवं विधायी विभाग से एएलआर रणवीर सिंह व अवर सचिव विष्णु देव मौजूद रहे।
कपिल देव को सरकार ने लगा दिया था कुलाधिपति
प्रदेश सरकार ने खेलकूद विवि विधेयक-2019 को अगस्त महीने में सदन में पारित कराया था। इसके बाद क्रिकेटर कपिल देव को सितंबर 2019 में कुलाधिपति लगा दिया गया। लेकिन, राष्ट्रपति ने विधेयक के अनेक प्रावधानों पर आपत्ति लगाते हुए इसे वापस लौटा दिया। जिस पर सरकार ने इसे वापस ले लिया और मार्च 2021 में फिर विधानसभा में लाई। लेकिन, विपक्ष की जायज आपत्तियों के कारण मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसे प्रवर समिति को भेजने पर राजी हो गए। उन्होंने बहुमत के बल पर इसे पारित नहीं कराया। विधेयक पर पेंच फंसने के कारण कपिल देव ने कुलाधिपति पद पर ज्वाइन नहीं किया था।