कृषि विभाग के अनुसार, इस बार राज्य में 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई की गई थी। माझा और दोआबा क्षेत्र में धान की कटाई का काम लगभग समाप्त हो चुका है जबकि मालवा क्षेत्र, जिसमें कुल धान क्षेत्र का लगभग 68 फीसदी हिस्सा आता है, में कटाई का काम अभी जारी है।
उधर, राज्य सरकार द्वारा पराली जलाने से रोकने के लिए लगातार किए जा रहे उपायों का कोई असर राज्य में दिखाई नहीं दे रहा। इस समय दूरदराज के खेतों में ही नहीं बल्कि जीटी रोड के किनारे खेतों में भी दिन-रात पराली जलने से धुआं उठता देखा जा सकता है। पराली के निस्तारण के लिए मशीनें उपलब्ध कराने की योजना के अलावा राज्य सरकार द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान असफल साबित हुए हैं।
पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 7 नवंबर 2022 के दौरान पंजाब में पराली जलाने की 32486 घटनाएं दर्ज की गईं। इसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान का जिला संगरूर सबसे आगे है, जहां इस अवधि के दौरान पराली जलाने के 5025 मामले दर्ज किए गए। बाकी जिलों में, पटियाला में 3091, तरनतारन में 2973, फिरोजपुर में 2788, बठिंडा में 2415, बरनाला में 1849, मानसा में 1641, लुधियाना में 1501, मोगा में 1460, अमृतसर में 1452, मुक्तसर में 1385, होशियारपुर में 220, रोपड़ में 198, नवांशहर में 198 और मोहाली में 99 मामले दर्ज हुए हैं। इस सीजन में अब तक पंजाब में 2 नवंबर को एक दिन में सबसे ज्यादा 3,634 मामले सामने आए हैं। हालांकि 3 नवंबर को यह आंकड़ा 2666 तक गिर गया था। 7 नवंबर को पंजाब में पराली जलाने के 2,487 मामले दर्ज किए गए।