चंडीगढ़। पिछले साल लॉकडाउन में पांच गमलों के साथ बागबानी की शुरुआत की थी, एक साल के अंदर ही 50 से ज्यादा पौधों में पौधे खिल रहे हैं। यह कहना है सेक्टर- 45 निवासी उमेश कांत मिश्रा और रंजना मिश्रा का। उनका कहना है कि बागवानी कर हम अपने साथ-साथ आसपास के लोगों को भी ऑक्सीजन प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले साल लॉकडाउन लगने से जब सब कुछ बंद हो गया था, तब वे घर पर रहकर परेशान हो रहे थे। सारा दिन टीवी और अखबारों में कोरोना से संबंधित खबरें पढ़कर मन में डर पैदा हो रहा था। तभी विचार आया कि बागवानी की जाए। वे बागवानी में इतना खो गए कि सारा तनाव और डर गायब हो गया। उनके घर में लगभग 50 गमले और जमीन में कई सब्जियां लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कम जगह में ही अपने बगीचे को मेंटेन कर रहे हैं। उनके घर में लगभग 20 से ज्यादा प्रकार के पौधे हैं। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए लोगों को अपने घर में जरूर बागवानी करने के साथ-साथ पौधे लगाने चाहिए।
सुबह और शाम बागवानी में एक घंटा समय बीताने से थकान हो जाती है दूर
उन्होंने कहा कि पिछले साल से अब तक अनुभव यही कहता है कि सुबह और शाम यदि एक घंटा पौधों से भरी हरियाली में निकाल लिया जाए तो इससे सारी थकान और चिड़चिड़ापन दूर हो जाता है। बागवानी समय बिताने और खुशी महसूस करने का एक बहुत ही अच्छा विकल्प है।
यूट्यूब से जानकारी लेकर शुरू की बागवानी
रंजना मिश्रा ने बताया कि शुरू में उन्हें पौधों की देखभाल करने की कोई जानकारी नहीं थी। इसके लिए उन्होंने यूट्यूब की सहायता ली। शुरू में ई पौधे खराब भी हुए, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें पता लग गया कि पौधों को किस समय पर कितनी खाद और पानी की आवश्यकता होती है। आज वह खुद इतने सक्षम हैं कि उन्हें माली तक की आवश्यकता नहीं पड़ती। तीन-चार महीने बाद माली को बुलाकर वह दिखा लेते हैं।
गौशाला से लेकर आते हैं गोबर की खाद
उन्होंने बताया कि वह अपने पौधों के लिए केवल गोबर की खाद ही प्रयोग करते हैं। इसके लिए वह सेक्टर 45 की गौशाला से खाद और सेक्टर 26 से दवाई लेकर आते हैं। जिस का छिड़काव दो महीने में एक बार करना होता है। उनका कहना है कि यदि पौधों की सही प्रकार से देखभाल की जाए तो छिड़काव की कम आवश्यकता पड़ती है।
उन्हें देखकर बच्चों की भी बढ़ रही रुचि
उन्होंने बताया कि उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं। आज कल स्कूल बंद होने के कारण घर पर ही ऑनलाइन कक्षाएं लग रही हैं। खाली समय में बच्चे उन्हें बागवानी करते देखते हैं। धीरे धीरे उनकी भी बागवानी में रुचि बढ़ती जा रही है। कई बार वह खुद ही पौधों को देखकर उन्हें छाया में रख देते हैं और जरूरत पड़ने पर सुबह-शाम पानी भी देते हैं।