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अभागे बाप की दर्दनाक कहानी, दो बेटों की मौत और दोनों को नहीं दे पाया कंधा

Thu, 20 Apr 2017 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
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अंबाला कैंट में सड़क हादसा
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एक अभागे बाप की दर्दनाक कहानी सुनिए। पहले बड़े बेटे की और अब छोटे बेटे की हादसे में मौत हो गई, पर वह दोनों की अर्थी को कंधा नहीं दे पाया। घटना हरियाणा के अंबाला की है। जिन बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए इकबाल सिंह इंग्लैंड में मेहनत करने गए थे। उन्हीं बच्चों के शव को अंतिम समय में वह कंधा नहीं दे सके।
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इकबाल सिंह ने तीन साल में ही अपने दोनों जवान बेटों को खो दिया। सड़क हादसों में दोनों की मौत हुई, लेकिन दोनों बार वे अंतिम संस्कार में नहीं आ पाए। हाल ही में उनके छोटे बेटे की हादसे में मौत हुई। अंबाला कैंट निवासी इंद्रपाल सिंह ने बताया कि तलविंदर के दोस्त मनोज का जन्मदिन था। कार में उसके साथ सिटी का रहने वाला मन्नी, नितिन, मनोज व प्रकाश और कैंट का रहने वाला लवली था।

वह रात को लगभग 11 बजे सिटी से कैंट खाना खाने के लिए आ रहे थे। तलविंदर अपनी स्विफ्ट कार चला रहा था। काली पलटन पुल के पास उनकी कार के सामने अचानक गाय आ गई जिसे बचाने के चक्कर में उसने कट मारा और कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराते हुए पलट गई।
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लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

अंबाला कैंट में सड़क हादसा
हादसे में कार सवाल सभी गंभीर रूप से घायल हो गए। लोगों की मदद से चार घायलों को सिविल अस्पताल ले जाया गया और तलविंदर व नितिन को एंबुलेंस में कैंट सिविल अस्पताल लेकर आए। इसके बाद परिवार के लोग कैंट सिविल अस्पताल पहुंचे जहां से तलविंदर की मौत का पता लगा।

हादसे में घायल हुए मन्नी, प्रकाश और मनोज पीजीआई में भर्ती हैं तो लवली का चंडीगढ़ के सेक्टर 32 में इलाज चल रहा है। हादसे में घायल हुए नितिन ने बताया कि उसे मामूली सा उपचार देकर कैंट सिविल अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर दिया। रात भी खून से लथपथ यूं ही पड़ा रहा जिस पर मक्खियां मंडराती रहीं। सुबह परिवार के लोगों ने आकर खून साफ किया।

इंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनके बड़े भाई इकबाल सिंह इंग्लैंड में रहते हैं। लगभग तीन साल पहले उनके बड़े बेटे गुरविंदर सिंह की हिसार रोड पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही गुरविंदर की मौत हो गई थी जिसके बाद तलविंदर ने अपनी भाभी से शादी कर ली थी।

परिवार की महिलाओं की हालत को देखते हुए उस वक्त भी इकबाल सिंह ने कलेजे पर पत्थर रखकर गुरविंदर का अंतिम संस्कार करने को कह दिया था और अब की बार भी उन्होंने ऐसा ही फैसला लिया।
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