चंडीगढ़ में आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम पांच माह बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। इसके लिए निगम अगले सप्ताह तक टेंडर लगाकर कंपनियों से आवेदन मांगेगा। कंपनी के साथ करार रद्द होने के बाद निगम ने एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की। लोगों की शिकायत पर यही कहता था कि कर्मचारी नहीं हैं। वहीं कुत्तों को पार्क में टहलाने को लेकर चालान की स्थिति भी अधर में है।
फरवरी माह की सदन की बैठक में भी आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता जताई गई थी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे इतने प्रयासों के बावजूद आवारा कुत्तों को रोकने में निगम नाकाम रहा है। लोग हमें आकर समस्या बताते हैं लेकिन कुत्तों को पकड़कर कहां ले जाते हैं, नसबंदी का स्टेटस का भी पता नहीं चलता। निगम आयुक्त ने सदन में कहा कि गोवा ने स्वयं को रैबीज फ्री घोषित किया है। उन्होंने वहां काफी प्रयास किया तब इस उपलब्धि तक पहुंचे हैं। हम वहां के नियमों को चेक कर लेते हैं उन पर अमल करेंगे और थोड़ी सख्ती बढ़ाई जाएगी तो काफी हद आवारा कुत्तों की समस्या से निजात भी मिल सकेगी। मार्च माह की सदन की बैठक में प्रस्ताव आया तो उसमें जुर्माना 2 हजार से कम करके 500 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया। आयुक्त का कहना है कि पेट बायलॉज के अनुसार इससे ज्यादा जुर्माना नहीं लगा सकते। इस पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने विरोध कर दिया। आयुक्त ने कहा कि नियम के खिलाफ हम भी चालान नहीं कर सकेंगे।
शहर में एक बड़ी समस्या कुत्तों को टहलाने की है। लोगों को कहना है कि निगम चालान तो कर देता है लेकिन टहलाने कहां जाएं। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सदन की बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि नगर निगम बड़े पार्कों का कुछ हिस्सा कुत्तों को टहलाने के लिए बना दे। इससे लोगों को अपने कुत्ते को टहलाने के लिए एक जगह मिल जाएगी और निगम सख्ती से कार्रवाई भी कर सकेगा। निगम ने रायपुरकलां में भी एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर और डॉग केयर यूनिट बनाने का प्रस्ताव भी सदन को दिया है। सदन ने इस पर सहमति तो दे दी है लेकिन पहले चल रहे कार्यों का ब्योरा भी मांगा है।
अधिकारियों के अनुसार, एक अप्रैल 2015 से लेकर अगस्त 2021 तक 17,445 आवारा कुत्तों को निगम की ओर से एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए हैं। इसके बाद कोरोना के कारण इंजेक्शन नहीं लगाए गए। 2012 में हुए सर्वे के अनुसार, शहर में कुल 7900 आवारा कुत्ते थे, जो अब 15 हजार से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं 7100 पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराया गया था, जो अभी 11 हजार तक पहुंचा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लॉकडाउन से पहले सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में प्रतिदिन जहां 15 से 20 केस कुत्तों के काटने के आते थे, वहीं गर्मियों में यह आंकड़ा 50 तक पहुंच जाता है। कोरोना काल में गर्मियों में भी मरीजों की संख्या कम रही, क्योंकि लोग घरों में थे। अब सब खुल गया है तो फिर यह समस्या बढ़ेगी।
आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए अगले सप्ताह तक टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कंपनी नहीं आई तो अपने स्तर पर हम डॉक्टर की व्यवस्था करके इस समस्या को सुलझाएंगे। रही बात चालान की तो हम नियम के विपरीत चालान नहीं कर सकते हैं। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम