चंडीगढ़ में आटो और कैब चालकों की हड़ताल।
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ट्राइसिटी में मंगलवार को टैक्सी व ऑटो चालकों की 24 घंटे की हड़ताल का मिलाजुला असर रहा। कैब व टैक्सी सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप रहीं लेकिन ऑटो सड़कों पर पहले की ही तरह दौड़ते दिखाई दिए। हालांकि हाथ जोड़कर हड़ताली टैक्सी चालक उन्हें रोकते-समझाते नजर आए। कई ऑटो चालकों ने उनकी बात मानी और बीच रास्ते ही सवारियों को उतार दिया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
एग्रीगेटर कंपनियों और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ ट्राइसिटी कैब-ऑटो संयुक्त मोर्चा की तरफ से मंगलवार को चक्काजाम का एलान किया गया था। जिन कैब और ऑटो चालकों ने हड़ताल में शामिल होने का फैसला नहीं लिया, उन्हें पूरे दिन मनाने का दौर चलता रहा। शहर के एंट्री प्वाइंट्स, पीजीआई, बस स्टैंड व अन्य अस्पतालों के पास ऑटो व कुछ टैक्सियां चलती दिखीं।
हड़ताल करने वाले चालकों ने दावा किया कि ज्यादातर कैब व टैक्सियों के चालक हड़ताल में शामिल रहे और उनका बंद पूरी तरह सफल रहा। जो लोग कैब व टैक्सी चला रहे थे, उन्हें बाद में मना लिया गया। इस हड़ताल का थोड़ा असर बसों में सवारियों की संख्या पर भी दिखा। बस स्टैंड से चलने वाली सभी बसें भरी हुई थीं। इस दौरान टू-व्हीलर टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियों की चांदी रही।
रैपिडो में बाइक चलाने वालों के पास काफी सवारियां दिखीं। कैब चालक उन्हें भी रोकते हुए नजर आए। हालांकि इनमें से कुछ ने बात मानी तो ज्यादातर उन्हें नजरअंदाज कर सवारियां बैठाते दिखाई दिए। चक्काजाम करने के बाद कुछ कैब चालक सेक्टर-17 में एकत्रित हुए और इसके बाद वो सेक्टर-18 स्थित स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर पहुंचकर अपनी मांगों का एक पत्र एसटीए को सौंपा।
कैब व ऑटो चालकों ने एसटीए को सौंपा इन मांगों का पत्र
- प्रशासन अपनी अधिसूचना में बढ़ी हुई दरों को एग्रीगेटर कंपनी से लागू करवाए
- एसटीए व एग्रीगेटर कंपनियों के झगड़े में कैब व ऑटो ड्राइवर को न पीसा जाए
- कोई कर या फीस बकाया है तो एग्रीगेटर कंपनी भुगतान करे
- एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से गलत तरीके से बंद की गईं चालकों की आईडी को तत्काल खोला जाए
- सीटीयू बस स्टॉप की तर्ज पर पिक एंड ड्राप स्टॉप बनाए जाएं
- किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाए
- दिल्ली की तर्ज पर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए
- पिक लोकेशन 2 किमी से अधिक होने पर 10 रुपये प्रति किमी जोड़े जाएं
- कैब ऑपरेटर और पार्टनर का 10 लाख रुपये का बीमा हो