पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के बावल और इसके आसपास की अधिगृहीत की जा रही 3600 एकड़ जमीन पर अधिग्रहण की प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
भूमि अधिग्रहण संघर्ष कमेटी के भजन लाल ने एडवोकेट विकास चौधरी के जरिए दायर एक याचिका दायर में आरोप लगाया था कि जनहित कार्यों के नाम पर यह भूमि 14 जुलाई 2011 अधिग्रहण करने के लिए नोटिस जारी किया गया था और अब कलेक्टर ने मुनादी करवा दी है कि जमीन अधिग्रहीत होने जा रही है।
याचिका में कहा गया है कि जमीन अधिग्रहण के लिए अब तक की गई प्रक्रिया पुराने अधिग्रहण एक्ट के तहत की गई है, जबकि एक जनवरी 2014 से नया एक्ट आ चुका है।
इसके तहत जमीन का मुआवजा शत प्रतिशत मिलने के बाद ही सरकार जमीन का कब्जा ले सकती है, लिहाजा इस 3600 एकड़ जमीन की आगे की प्रक्रिया नए एक्ट के मुताबिक की जाए।
वैसे भी पुराने एक्ट के तहत 10 फीसदी मुआवजा मिलने के बाद ही कब्जा लिया जा सकता है। लेकिन अभी तक इसकी प्रक्रिया भी मुकम्मल नहीं हो सकी है और याचिकाकर्ता को भय है कि कलेक्टर की मुनादी के बाद उनकी जमीन अधिग्रहीत कर ली जाएगी।
याचिका में कहा है कि नए एक्ट के मुताबिक जिस जमीन के अधिग्रहण के लिए एक्ट बनने से पहले मुआवजा तय न हो, उस जमीन के लिए मुआवजा नए एक्ट के मुताबिक होगा।
इन तथ्यों के साथ याचिका में जमीन अधिग्रहण की आगे की प्रक्रिया नए एक्ट के मुताबिक करने का आग्रह किया गया था और हाईकोर्ट ने अब तक हुई अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।