श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ढाल बनाकर अजनाला थाने पर हमला करने की घटना के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने जांच कमेटी की रिपोर्ट लौटा दी है। रिपोर्ट में कमेटी के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। अब यह रिपोर्ट दोबारा कमेटी के सभी सदस्यों के बीच रखी जाएगी। सभी सदस्यों के हस्ताक्षरों के बाद ही इस कमेटी की रिपोर्ट को पांच सिंह साहिब की बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अजनाला कांड के बाद बनी 17 सदस्यीय कमेटी ने सीलबंद रिपोर्ट कमेटी के को-आर्डिनेटर करनैल सिंह पीर मुहम्मद के माध्यम से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी थी। इसमें बताया गया है कि धरने के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप ले जाना सही है या नहीं। छह मार्च को 17 सदस्यीय कमेटी की लंबी बैठक हुई थी। बैठक के दौरान दमदमी टकसाल, अखंड कीर्ति जत्था, सिख मिशनरी कॉलेज, गुरु गोबिंद सिंह स्टडी सर्कल और अन्य सिख विद्वान उपस्थित थे लेकिन कमेटी के सभी सदस्य हाजिर नहीं थे।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कमेटी को 15 दिन का समय दिया था लेकिन कमेटी ने सात दिन में रिपोर्ट तैयार कर जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंप दी। अजनाला मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार हरप्रीत सिंह से बार-बार नेता कार्रवाई की मांग रहे थे। इसके बाद जत्थेदार ने 17 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।
हर सिख को बेबाक बनने की जरूरत: ज्ञानी हरप्रीत सिंह
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए हर सिख को बेबाक होने की जरूरत है। अगर हम अपने हकों के लिए आवाज नहीं उठा सके तो हम दूसरों की नजर में कमजोर हो जाएंगे। ज्ञानी हरप्रीत सिंह श्री हरमंदिर साहिब परिसर में निहंग मुखी रहे बुढ्ढा दल के मुखी बाबा फूला सिंह की दूसरी शहीदी शताब्दी पर गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे।
जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने कहा कि अकाली बाबा फूला सिंह खालसा रियासत के स्तंभ थे और उनकी शहादत के मौके पर महाराजा रणजीत सिंह ने शोक में आकर कहा था कि सिख रियासत के एक महानायक का देहांत हो गया है। उनका पूरा जीवन खालसा रियासत और सिख पंथ की भलाई के लिए रहा, जो वर्तमान पीढ़ी को बताना बहुत जरूरी है। आज कुछ ताकतें और सरकारें सिखों को भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। सिख सत्ता को कमजोर करने के उद्देश्य से सरकार के बल पर सिख संस्थाओं पर अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने इस तरह के पंथ विरोधी हथकंडों और ऐसे कपटी हमलों का जवाब पंथक एकता के साथ देने की अपील की।