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हार्ट और ब्रेन अटैक के मरीजों की अब बचाई जा सकेगी जान

Wed, 05 Mar 2014 01:12 AM IST
आशीष वर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
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एक बार जिसे ब्रेन व हार्ट अटैक आता है तो उसमें से कई लोगों में दोबारा से अटैक की आने की आशंका बढ़ जाती है। दोबारा अटैक से जिंदगी का खतरा काफी बढ़ जाता है। बचने के बहुत ही कम चांस होते हैं, लेकिन चंडीगढ़ की सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (इमटेक) ने इस बीमारी का भी तोड़ निकाल लिया है।
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कुछ यूं होता है हार्ट व ब्रेन अटैक

हृदय को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनियों में जब रक्त के थक्के जम जाते हैं तो रक्त का प्रवाह पूरी तरह से या फिर आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाता है। इससे हृदय को आक्सीजन की आपूर्ति नहीं होती तो हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। 80-90 प्रतिशत हार्ट अटैक का कारण खून का जमना होता है। हार्ट अटैक के बाद मरीजों को क्लाट बर्स्टिंग ड्रग दिया जाता है, जो रक्त के थक्के को हटाता है। इससे खून की दौड़ान तेज होती है और मरीज को बचाया जाता है। इसके बाद प्राथमिक एंजियोप्लास्टी की जाती है। यदि मरीजों को क्लाट बर्स्टिंग ड्रग मौके पर न दिया जाए तो उनकी जान बचाना मुश्किल होता है।

पेशेंट पर कुछ ऐसे काम करेगी ये दवा

डा. गिरीश के मुताबिक ड्रग की तकनीक को पेटेंट कराने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बाजार में ड्रग आने में कम से कम आठ साल लगेंगे। पेटेंट के बाद ट्रायल और उसके बाद ही यह दवा बाजार में उपलब्ध होगी।

उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक के बाद जब दोबारा से इसकी संभावना होगी तो दवा एक्टिव हो जाएगी और धमनियों में जमा रक्त के थक्के को हटा देगी। यानी इसका असर काफी देर तक धमनियों में रहेगा। अब तक जो दवा बाजार में उपलब्ध है, उसका काम रक्त के जमे थक्के को हटाना था। उसके बाद इसका काम खत्म हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। एक बार रक्त के थक्के को हटाने के बाद वह दोबारा से एक्टिव हो जाता है।

देश और विदेश में बजाएगा भारत का डंका

इमटेक ने ऐसा ड्रग तैयार किया है जो दोबारा से धमनियों में रक्त जमा होने को रोकेगा। यह तकनीक इमटेक ही नहीं, बल्कि भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस क्षेत्र में भारत पूरे विश्व में सुपर बन जाएगा। इससे देश की आर्थिक व्यवस्था को सहयोग तो मिलेगा साथ ही हार्ट व ब्रेन से संबंधित मरीजों के लिए बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। इमटेक के डायरेक्टर डा. गिरीश साहनी ने इसकी सफलता का श्रेय अपने सभी साथियों को दिया है।
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भारत की यह पहली बायोथैरेपिक दवा

रक्त के थक्के को हटाने वाली भारत की पहली ड्रग बनाने का श्रेय भी इमटेक को ही जाता है। इमटेक ने यह तकनीक साल 1992 में तैयार कर ली थी। इसके बाद इमटेक ने इसके दो और वर्जन तैयार किए है। तीसरे वर्जन के फेज वन का ट्रायल सफल हो चुका है।

अब उसके मानव ट्रायल की तैयारी चल रही है। इसकी स्वीकृति भी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया ने हाल ही में दे दी है। यह भारत की पहली बायोथैरेपिक दवा है। इमटेक के डायरेक्टर डॉ. गिरीश साहनी के मुता‌बिक इमटेक की इस तकनीक से भारत ड्रग के क्षेत्र में सुपर बन जाएगा। यह क्लाट बस्टर का चौथा वर्जन है। इसके पेटेंट की तैयारी चल रही है।
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