खुद मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि चंडीगढ़ हरियाणा की राजधानी है और भविष्य में भी रहेगी। इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला भी चंडीगढ़ पर अपना दावा जताते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।
रविवार को इस संबंध में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने आवास पर कैबिनेट की बैठक बुलाई। बैठक में फैसला लिया गया कि आगामी पांच अप्रैल को 11 बजे, हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इस संबंध में राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष को जल्द पत्र भेजा जाएगा।
1966 से चल रहा है विवाद
वर्ष 1966 में हरियाणा पंजाब से अलग राज्य बना था। उसी समय से चंडीगढ़, एसवाईएल समेत हिंदी भाषी क्षेत्रों को लेकर विवाद चल रहा है। हर चुनाव में एसवाईएल का मुद्दा उठता है लेकिन समाधान आज तक नहीं हो पाया है। सुप्रीम कोर्ट तक हरियाणा के पक्ष में फैसला दे चुका है। पंजाब की नई सरकार ने चंडीगढ़ पर अपना दावा जताया तो तकरार दोबारा से बढ़ती चली गई। इस समय दोनों ही प्रदेशों के नेता अपने अपने दावे जता रहे हैं।
हरियाणा कैबिनेट की बैठक के समय में बदलाव
हरियाणा कैबिनेट की बैठक के समय में बदलाव किया गया है। अब यह बैठक 5 अप्रैल को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र के तुरंत बाद दोपहर 3 बजे सचिवालय में बुलाई गई है। पहले यह बैठक 6 अप्रैल को शाम 5 बजे होनी थी। पंजाब सरकार द्वारा सदन में चंडीगढ़ पर दावा जताने के बाद यह बैठक बुलाई गई है।
चंडीगढ़ हरियाणा की राजधानी है और रहेगी: दिग्विजय चौटाला
जननायक जनता पार्टी के प्रधान महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि पंजाब सरकार अपने लोगों में वाहवाही लेने के लिए कुछ कहती रही, चंडीगढ़ हरियाणा की राजधानी है और रहेगी। हरियाणा के लोग चंडीगढ़ को साझा रखना भी जानते हैं और अकेला भी। पंजाब की नई सरकार को गलतफहमी न रहकर संविधान की जानकारी रखनी चाहिए और हरियाणवियों से आपसी भाईचारे की सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ और एसवाईएल नहर पर हरियाणा का हक है और हरियाणा के लोग अपना हक लेना अच्छे से जानते हैं। पंजाब सरकार द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि 55 साल से चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है। एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आ चुका है, इसलिए चंडीगढ़ और एसवाईएल पर हरियाणा का हक है। पंजाब सरकार को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए क्योंकि हरियाणा के लोग जहां शांति से हुए बंटवारे में भाईचारे से रहना जानते हैं तो वहीं कोई अन्याय होता है तो अपना हक लेना भी जानते हैं।