कर्नल सोही ने बताया कि दस्तावेज उनके हाथ लगने के बाद यह मामला सेना के समक्ष उठा। उनकी किस्मत अच्छी रही कि सेना से सकारात्मक जवाब मिला। इसके बाद उनकी तरफ से बहुत सारे दस्तावेज पूरे किए गए। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लग गया। इस दौरान डायरेक्टर सैनिक वेलफेयर पंजाब से संपर्क किया लेकिन कोई सफलता नहीं।
एक कमरे में रहते थे दोनो
2006 में प्रेम सिंह पुरी ने अपनी मौत से पहले कुछ पैसे छोड़े थे। हालांकि बाद में उनकी संस्था ने भी उनकी वित्तीय मदद की। पेंशन की रकम की अदायगी के लिए बैंक की टीम पहुंची तो भी दिक्कत आई। सेहत ठीक न होने की वजह से उन्होंने रणजीत कौर की पहचान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद संस्था ने उक्त मामले की फिर पैरवी की। इसे बाद रणजीत कौर को साल 2007 से 18 लाख रुपये मिलेंगे। 16 हजार रुपये पेंशन, मुफ्त मेडिकल, सीएसडी कैंटीन व एक्स सर्विसमैन की अन्य सुविधा प्राप्त होगी।
अब तक 400 फौजियों को दिलाया इंसाफ
कर्नल सोही ने बताया कि गत 22 सालों से उनकी संस्था पूर्व फौजियों व उनके परिवारों के हकों के लिए लड़ रही है। उन्होंने कहा कि सेवा ही उनकी संस्था का धर्म है। अब तक 400 से अधिक पूर्व फौजी व उनकी विधवाओं को वह पेंशन दिलवा चुके है।