ताबूत पर अपना सिर रखकर रोती सैनिक की पत्नी।
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पंजाब के कस्बा श्री हरगोबिंदपुर के सलोवाल के रहने वाले भारतीय सेना के 27 वर्षीय जवान मनिंदरप्रीत सिंह का पैतृक गांव में रविवार दोपहर बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में पूरे गांव में मातम छाया था और परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था। शनिवार को सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह का ब्रेन अटैक के कारण पठानकोट क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था।
सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर को तिरंगे से लपेटे ताबूत में बंद कर 14 सिख एलआई रेजिमेंट के जवान लेकर पैतृक गांव सलोवाल पहुंचे। रविवार को गांव के श्मशान घाट में सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह के पार्थिव शरीर को बटालियन के जवानों ने आखिरी सलामी दी। वहीं अरदास के बाद सैनिक मंनिदरप्रीत सिंह के पिता दलीप सिंह ने अपने बेटे के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में न तो कोई सरकारी अधिकारी पहुंचा और न ही कोई राजनेता। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस बात का गर्व है कि मनिंदरप्रीत सिंह ने देश की सेवा करते अपने जीवन का बलिदान दिया है। उन्होंने बताया कि सात साल पहले वह सेना में भर्ती हुआ था और 14 सिख एलआई में तैनात था।
उन्होंने बताया कि शनिवार को उसकी रेजिमेंट के अधिकारियों ने सूचना दी थी कि मनिंदरप्रीत सिंह की मौत ब्रेन अटैक से हो गई है। उन्होंने बताया कि सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और छह साल की एक बेटी छोड़ गया है। वह सरकार से मांग करते हैं कि पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए और जब उसकी बेटी बड़ी हो जाए तो सरकार उसे सरकारी नौकरी दे।
ताबूत पर सिर रखकर सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह की पत्नी रोती-बिलखती रही
तिरंगे से लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा तो सैनिक मनिंदरप्रीत सिंह की पत्नी कमलजीत कौर ने ताबूत पर अपना सिर रख दिया और करीब 15 मिनट वह ताबूत पर सिर रखकर रोती बिलखती रही। कमलजीत कौर ने बताया कि मनिंदरप्रीत सिंह कहते थे कि वह हमेशा उसके साथ हैं। उनके पति हमेशा उसे कहते थे कि वह अपनी बेटी को बहुत पढ़ाई करवाएंगे। वह कहते थे कि अगर उनकी बेटी फर्स्ट आएगी तो वह अपनी बेटी को लैपटॉप लेकर देंगे।