पहले दिन 23 आंदोलनकारी रहे क्रमिक भूख हड़ताल पर, बोले-जरूरत पड़ी तो परिवार की महिलाएं और बच्चे भी करेंगे भूख हड़ताल
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आरक्षण और अन्य मांगों पर जसिया में पिछले 6 दिन से आंदोलन पर बैठे जाटों ने प्रशासन का बातचीत का न्यौता ठुकरा दिया है। सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए धरने पर अब क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है।
धरना खत्म कराने के लिए तीन दौर की वार्ता विफल होने के बाद अब डीसी अतुल कुमार ने जाट नेताओं को आज सिंचाई विश्राम घर में बातचीत के लिए बुलाया था। धरने के आयोजक अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (यशपाल मलिक गुट) के जिलाध्यक्ष अशोक बल्हारा ने डीसी से मिलने से साफ इंकार कर दिया।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि वे कहीं पर भी वार्ता के लिए नहीं जाएंगे। सरकार मांग पूरी कर दे, उसी समय धरना खत्म कर देंगे। धरना दे रहे जाटों ने आज सीएम की महम में होने वाली रैली का भी बहिष्कार कर दिया है। वक्ताओं ने आग्रह किया कि सीएम महम रैली को स्थगित कर दें। धरने पर महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। महिलाएं अपने साथ बच्चों को भी लेकर आईं।
मैं मुकद्दमों से नहीं डरता, जल्द आऊंगा रोहतक: मलिक
जाट आरक्षण के लिए विरोध
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भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस झेल रहे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने गिरफ्तारी से घबराने के आरोपों का जवाब दिया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा और अब यूपी के अलग-अलग जिलों में भी धरने शुरू किए जा रहे हैं। इसमें अभी तीन-चार दिन का समय लगेगा।
इसके बाद रोहतक में आऊंगा। जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि केस के कारण गिरफ्तारी के डर से पीछे हट रहा हूं तो उन्हें बताना चाहूंगा कि मुझ पर यह पहला मुकद्दमा नहीं है। इससे पहले भी कई केस दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में डर किस बात का।
ये हैं मांगें
जाट आंदोलन
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फरवरी में हुए आंदोलन के दौरान हिंसा को लेकर जाट युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। गिरफ्तार युवाओं को रिहा किया जाए। आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी की भी मांग की जा रही है। जाटों समेत 6 जातियों को आरक्षण संबंधी विधेयक सरकार ने पारित कर दिया है। लेकिन अभी यह मामला कोर्ट में अटका हुआ है। जाट चाहते हैं कि सरकार कोर्ट में आरक्षण की पैरवी मजबूती से करे।