सभी देशों में झीलों के पुनरुद्धार एवं उनकी जल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए सघन प्रयास किए गए हैं। इसी के तहत जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कानून बनाए गए और इसी के साथ विश्व स्तर पर संरक्षण प्रयासों के तहत 1971 में नम भूमि पर आयोजित रामसर कन्वेंशन में भी सक्रिय रूप से भागीदारी की थी।
इस वर्ष पंजाब के तीन नए वेटलैंड हुए शामिल
रामसर प्रोजेक्ट में पंजाब के तीन नए वेटलैंड शामिल हुए हैं, जिसके कारण उत्तर प्रदेश के बाद देश में पंजाब के सबसे अधिक वेटलैंड हो गए हैं। 2020 में पंजाब के केशोपुर मिआनी कम्युनिटी रिजर्व, व्यास संरक्षण रिजर्व और नंगल वन्यजीव अभ्यारण्य को शामिल किया गया है। पहले हरिके झील, कंजली झील और रोपड़ के वेटलैंड रामसर प्रोजेक्ट में शामिल थे। अब पंजाब की इस प्रोजेक्ट में संख्या छह हो गई है।
साल भर पानी में डूबे भू-भाग को कहते हैं वेटलैंड
वेटलैंड ऐसा भू-भाग होता है जहां के पारितंत्र का बड़ा हिस्सा स्थायी रूप से या प्रतिवर्ष किसी भी मौसम में जल से डूबा हो। ऐसे क्षेत्रों में जलीय पौधों की मात्रा अधिक रहती है। ऐसा भाग वेटलैंड को परिभाषित करता है। जैव विविधता की दृष्टि से वेटलैंड अत्यंत संवेदनशील होते हैं क्योंकि विशेष प्रकार की वनस्पति व अन्य जीव ही नमभूमि पर उगने और फलने-फूलने के लिये अनुकूलित होते है।
पंजाब के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। विभाग प्रयास कर रहा है कि इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाया जाएगा। वन विभाग प्रयास कर रहा है, जल्द ही कामयाबी हासिल होगी। जितेंद्र शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पंजाब