ऐसे जुड़ा था मजीठिया का नाम
साल 2013 में पंजाब पुलिस के पहलवान जगदीश सिंह भोला को छह हजार करोड़ की ड्रग तस्करी केस में गिरफ्तार किया था। उस समय राज्य में शिअद की सरकार थी। तब एक पेशी के दौरान मोहाली अदालत के बाहर जगदीश भोला ने बिक्रम मजीठिया का नाम लेकर आरोप लगाए थे। हालांकि, उस समय इस मामले में कुछ नहीं हुआ। इसके बाद जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में 2017 में कांग्रेस की सरकार बनी तो एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू की अगुवाई में एसटीएफ बनाई गई। उन्होंने साल 2018 में मामले में सरकार को एक रिपोर्ट दी। इसमें मजीठिया के नाम में शामिल होने दावा किया गया था। हालांकि, इसके बाद भी उन पर कोई केस दर्ज हुआ।
चुनाव से ठीक पहले दर्ज हुआ था केस
2022 में विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब मजीठिया पर 2018 की रिपोर्ट को आधार बनाकर स्टेट क्राइम ब्रांच में एनडीपीए एक्ट की धारा 25, 27ए और 29 के तहत केस दर्ज किया। 49 पेज की एफआईआर में उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। मुख्य आरोप था कि उन्होंने अपने वाहनों के जरिये ड्रग तस्करों की मदद की। नशा बेचने के काम को फाइनेंस किया। इसके अलावा आरोप था कि उनकी अमृतसर व चंडीगढ़ स्थित रिहायश में एक एनआरआई व नशा तस्करों को ठहराया गया। इन आरोपों में पकड़े गए नशा तस्करों के बयानों को आधार बनाया गया था। इस मामले में वह जेल भी गए। उन्होंने केस दर्ज होने के बाद अमृतसर से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अभी वह 10 अगस्त, 2022 से जमानत पर चल रहे हैं।
कुछ दिनों से चल रही थी जुबानी जंग
गत कुछ दिनों से मुख्यमंत्री भगवंत मान और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया में जुबानी जंग चल रही थी। सीएम ने पहले अरबी घोड़ों के मुद्दे को लेकर एक बयान दिया था। इसके बाद मजीठिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिकॉर्ड पेश किया था। साथ ही कहा था कि उसके पूर्वजों को बदनाम करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार उन पर दबाव बना रही है। उनकी पत्नी पर भी केस दर्ज करने की कोशिश की गई।
चुनाव के बाद किया था सरेंडर
बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ चरणजीत सिंह चन्नी के कार्यकाल में 20 दिसंबर, 2021 में एनडीपीएस एक्ट में मोहाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने तक मजीठिया की गिरफ्तारी पर रोक लगा उन्हें बड़ी राहत दी थी। मतदान के बाद 24 फरवरी को मजीठिया ने मोहाली की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उन्हें पटियाला जेल भेज दिया था। अभी वह जमानत पर हैं।