हरियाणा विधानसभा ने शुक्रवार को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन से जुड़े बिल को हरी झंडी दे दी। इसके साथ ही प्रदेश में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नियंत्रण से मुक्त कमेटी के गठन का रास्ता भी साफ हो गया है। हालांकि अभी विधानसभा में पारित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा जाना बाकी है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के सिखों को खुश करने का सफल प्रयास करते हुए शुक्रवार को आनन-फानन में बिल सदन में पेश करवाकर विपक्ष के एतराज के बीच पारित भी करवा दिया।
अब प्रदेश सरकार का दावा है कि इस बिल को मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजने की जरूरत नहीं है और बिल पारित हो जाने से हरियाणा के सिखों की लंबे से चली आ रही अलग कमेटी की मांग पूरी हो गई है।
एचएसजीपीसी बिल के मुताबिक अलग कमेटी हरियाणा के गुरुद्वारों और उनकी संपत्तियों की देखभाल करेगी। कमेटी का मुख्यालय कुरुक्षेत्र में होगा, जबकि क्षेत्रीय कार्यालय पंचकूला और जींद में होंगे।
विधेयक का खुलकर विरोध नहीं कर सका विपक्ष
विधानसभा में शुक्रवार को सत्ताधारी कांग्रेस की भांति ही चुनावी समीकरणों में उलझे विपक्षी दलों- इनेलो और भाजपा भी विधेयक का खुलकर विरोध नहीं कर सके। इनेलो ने सिखों के धार्मिक मामलों में दखल का आरोप लगाते हुए बिल का विरोध किया लेकिन भाजपा को सिर्फ यही ऐतराज था कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में पेश किया है।
दोनों दलों के विधायकों ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अलग-अलग समय सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विपक्ष की गैरहाजिरी में सदन ने इस बिल पर मोहर लगा दी। मुख्यमंत्री हुड्डा ने विपक्ष के एतराज को दरकिनार करते हुए कहा कि यह बिल हरियाणा के सिखों को उनके अधिकार देने के लिए लाया गया है और सरकार किसी भी धार्मिक मामले में दखल नहीं दे रही है।
इनेलो विधायक अशोक अरोड़ा ने सदन में आरोप लगाया कि सरकार सिखों के धार्मिक मामलों में दखल दे रही है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने हरियाणा के लिए 11 सदस्यीय कमेटी बनाई है तो अलग कमेटी बनाने की जरूरत नहीं है।
भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज का एतराज था कि शुक्रवार को ही बिल पेश होने से विधायकों को उसे पढ़ने का समय नहीं मिला है। हालांकि बहस का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया और सभी सदस्यों से समर्थन का अनुरोध किया।
झींडा और बाजवा भी रहे दर्शक दीर्घा में
दोपहर 3.23 बजे विधानसभा में बिल पेश किया गया। विपक्ष ने बिल को कम समय में लाने पर सवाल खड़े किए लेकिन संसदीय कार्यमंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसे सिखों के हित का फैसला बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से पास करने की गुजारिश की। सत्ता पक्ष ने बिल पास होने पर मेजें थपथपा कर इसका स्वागत किया।
विधानसभा की दर्शक दीर्घा में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहाक) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा सहित अनेक सिख नेता मौजूद रहे। बिल पास करने से पहले 2.18 बजे स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को एक घंटे के लिए स्थगित किया। 3.18 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद 3.23 बजे विधानसभा में बिल लाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के 2008 के फैसले का हवाला
हरियाणा के वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा ने सदन में सुप्रीम कोर्ट के 2008 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सूबे का इंचार्ज कोई भी कानून पास कर सकता है। इसे देखते हुए यह बिल केंद्र में भेजने का कोई मतलब नहीं है।
उन्होंने कहा कि अलग कमेटी बनाने के लिए एक लाख 40 हजार शपथ पत्र उनके पास आए थे, जिसमें से एक भी इसके खिलाफ नहीं था।
विपक्ष के बार-बार सवाल उठाने पर कि दस साल के कार्यकाल में कांग्रेस ने बिल पास क्यों नहीं किया, मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा कि यह मामला हरियाणा के सिखों का हित इससे जुड़ा हुआ है, लिहाजा विपक्ष सिर्फयह बताए कि वे बिल के समर्थन में है या विरोध में हैं।