फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेयर चुनाव हारते ही अकाली दल में दिखने लगा साइड इफेक्ट

Sat, 29 Aug 2015 03:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली नगर निगम के पहले मेयर का चुनाव हारते ही अकाली दल में बिखराब की स्थिति पैदा हो गई है। मेयर चुनाव की हार का ठीकरा अकाली दल के सीनियर नेता व जत्थेबंधक सचिव अमरीक सिंह मोहाली ने हलका इंचार्ज बलवंत सिंह रामूवालिया के सिर फोड़ा है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि रामूवालिया को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, उन्होंने मेयर चुनाव की हार संबंधी डिप्टी सीएम एवं पार्टी प्रधान सुखबीर बादल को पत्र भी लिखा है।

 लंबे समय के बाद चुप्पी तोड़ते हुए अमरीक सिंह मोहाली ने कहा कि मेयर चुनाव की हार के कलंक के लिए सिर्फ बलवंत सिंह रामूवालिया व उनके परिवारिक मेंबर ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अगर रामूवालिया अकाली-भाजपा का मेयर बनाने की सोची होती तो उन्हें कोई रोक नहीं सकता था।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि मेयर चुनाव में उनकी भूमिका नकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले वार्डबंदी के दौरान उन्होंने कई वार्डों में जानबूझकर तोड़फोड़ की, ताकि अकाली नेता चुनाव लड़ने से पीछे हट जाएं। कई उम्मीदवारों की टिकट तक काट दी गईं।

उन्होंने बताया कि मेयर चुनाव में 23 सीटें हासिल करने का जो गोल्ड मेडल जीतने का दावा रामूवालिया करते हैं। असल में वह उनकी मेहनत नहीं थी, बल्कि चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों द्वारा किए गए कामों और वोटरों से रखे गए संबंध से जीत मिली है।

प्रशंसा तो दूर नेताओं की शिकायतें की ऊपर
अमरीक मोहाली ने बताया कि जब बलवंत सिंह रामूवालिया पार्टी में शामिल हुए थे तो पार्टी की तरफ से उन्हें विधानसभा चुनावों में हलका मोहाली से उतारा गया था। इस दौरान पार्टी के सभी वर्करों व नेताओं ने जमकर मेहनत की। सौ फीसदी पार्टी के लिए दिया था। लेकिन, उन्होंने पार्टी नेताओं की प्रशंसा नहीं की। उल्टा पार्टी वर्करों व नेताओं की शिकायतें की थीं।

शुरू से ही पार्षदों को गुमराह किया
उन्होंने कहा कि मेयर चुनाव के लिए पार्टी के समूह पार्षद चट्टान की तरह खड़े थे। लेकिन, रामूवालिया ने पार्षदों को सिर्फ गुमराह ही किया है। वहीं, इलाके के लोकल नेताओं को भी उन्होंने विश्वास में नहीं लिया। इसके चलते ही यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय नेताओं को विश्वास में लिया होता तो अकाली दल के पार्षद 35 के पार होते।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें