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धर्म की रक्षा के लिए शहीद हुए थे श्री गुरु तेग बहादुर जी, गुरुद्वारा श्री रकाब गंज से जुड़ा ये इतिहास

Sun, 20 Dec 2020 10:25 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब में अरदास करते पीएम मोदी। - फोटो : @narendramodi
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सिख इतिहास कुबार्नियों से भरा है, पर 9वें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी की मिसाल पूरी दुनिया में नहीं मिलती है। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। वे प्रेम, त्याग और बलिदान के सर्वोच्च प्रतीक हैं।

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आज देश-दुनिया में श्री गुरु तेज बहादुर जी का शहीदी दिवस मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रविवार की सुबह अचानक दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री रकाब गंज साहिब पहुंचे। आइए जानते हैं इस स्थान का महत्व और श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी के बारे में...


पंजाब के अमृतसर में हुआ था जन्म
विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में  श्री गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम त्यागमल था। वे बाल्यकाल से ही धार्मिक, निर्भीक, विचारवान और दयालु स्वभाव के थे।

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इस्लाम को कबूलने से किया था मना

सन् 1675 में धर्म की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपना बलिदान दिया था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने श्री गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी, क्योंकि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने इस्लाम धर्म को अपनाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मुगल बादशाह के आदेश पर सबके सामने गुरु जी का सिर कलम कर दिया गया था। श्री गुरु तेज बहादुर जी को हिंद की चादर का जाता है।

दिल्ली में स्थित है उनका शहीद स्थल
दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा श्री रकाब गंज साहिब उनके सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक स्थल हैं। दरअसल, श्री गुरु तेग बहादुर जी की याद में उनके शहीदी स्थल पर जो गुरुद्वारा बना है, उसे गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब के नाम से जाना जाता है।

निर्भय आचरण और धर्म के प्रति अडिगता के सर्वोच्च उदाहरण थे गुरु जी 
यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। 
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