चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में शुक्रवार को आर्ट लिट अडाॅप्टेशन के साथ डॉ. सुनीत मदान के काव्य संग्रह प्वाइंटेसिया का विमोचन हुआ। इस काव्य संग्रह से ही नाट्य रूपांतरण किया गया। इसका मंचन निदेर्शन द नैरेटर्स परफाॅर्मिंग आर्ट्स सोसाइटी की संस्थापक और निर्देशक निशा लूथरा द्वारा हुआ। इसमें जीवन के संघर्षों, आनंदों के बारे में बताया है। इस मौके पर पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक अत्रे, आईआरएस समरिता गिल और प्रोफेसर डॉ. पुष्पिंदर कौर मौजूद रहे।
डॉ. सुनीत मदान ने कहा कि प्वाइंसेटिया उनकी पहली काव्य पुस्तक है। इसमें एक नई शैली विकसित करने की कोशिश की है जिसे उन्होंने डुप्ले वर्सेज नाम दिया है। उन्होंने बताया कि काव्य संग्रह का प्रत्येक शब्द उनके जीवन और विचारों का ही सारांश है। इस पर दो दशकों से काम किया है।
निशा लूथरा ने कहा कि हम जो भी किताब लाँच करते हैं वह हमारे लिए एक बच्चे की तरह होती है। गौरतलब है कि डॉ. मदान की कविताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति के मंचों पर व्यापक स्वीकृति मिली है।
निशा लुथरा ने बताया कि डॉ. सुनीत मदान की काव्य संग्रह से सात कविताओं को आधार बनाकर नाटक की प्रस्तुति हुई। इसमें जीवन के संघर्षों, आनंदों के बारे में बताया है। इसमें तीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी है। इसमें एक औरत के आसपास कहानी घूमती है। इसमें डॉ.सुनीत मदान ने भी प्रस्तुति दी है। इसमें दिखाया गया है कि वह कविता लिख रही हैं और पात्र जन्म ले रही हैं। उन्हीं की एक छवि जन्म लेती है।
नाटक में दिखाया गया कि हमारे अंदर राक्षस पलता है। कई बार दबा देते हैं। उसी को लेकर कविता तैयार किया है। इसमें दिखाया गया कि खूबसूरत युवती की शादी होती है। पहली रात में प्यार दिखता है। लेकिन नियंत्रण दिखाई पड़ता है। यह दिखाया कि वह बंध कैसे गई। प्यार के लिए आई थी। जब वह मां बनने वाली होती है तो किस प्रकार खुश होती है।
इसमें मुख्य भूमिका दिवजोत गुलाटी ने निभाई है। इसके अलावा शिवभ ढल्ल और राजा सुब्रह्मणियम ने भूमिका निभाई है।
इसमें दिखाया गया है कि वह बच्चे में खुशी ढूंढती है। बच्चे कब बड़े हो गए, पढ़ाई कर ली, डिग्री ले ली और बाहर चले गए पता नहीं चला। वह फिर से अकेली रह जाती है। पति में या बच्ची में खुशी ढूंढी। मैं क्या हूं। अंत में वह देखती है कि उनकी खुशी उनके अंदर है। इस नाटक को तैयार करने में दो महीने का वक्त लगा। इसकी अवधि 35 मिनट की है।
लाइट और सेट व्यवस्था अर्पण मैती ने संभाली। बैक स्टेज का प्रबंधन हरप्रीत सिंह ने किया और इसके सहायक निदेशक थे राजन बथेजा।
डॉ सुनीत मदान ने कहा कि पॉइंसेटिया एक जीवन यात्रा का प्रतीक है। यह समय सही होने पर जीवन के अर्थ को प्रकट करता है। प्वाइंटेसिया शीर्षक का लाक्षणिक कारण यह है कि पॉइंसेटिया%% एक पौधा है जो एक फूल से बनता है। इसमें कई पत्तियां भी होती हैं। जीवन के साथ भी ऐसा ही होता है। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री रीमा राणा ने की।