हरियाणा में एन्फ्लुएंजा वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच जांच किटों की कमी पड़ गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में अधिकतर मरीज फ्लू से संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में जांच कराने वालों की संख्या अचानक से बढ़ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण को लेकर भयभीत होने की जरूरत नहीं है, केवल कुछ सावधानियां बरतकर इससे बचा जा सकता है।
किटों की कमी के चलते फिलहाल चुनिंदा जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एच-1 एन-2 के ही टेस्ट किए जा रहे हैं। दरअसल, यह टेस्ट वायरोलाजी लैब में होते हैं। प्रदेश के पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरटीपीएस मशीनें और कोविड के समय वायरोलाजी लैब स्थापित की गई थी। इसलिए जिला अस्पतालों में आने वाले मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं लेकिन लैब में जांच किट कम होने के चलते जांच प्रभावित हो रही हैं। वैसे वायरस की रिपोर्ट आने में एक दिन का समय लगता है लेकिन सप्ताह तक रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
फिलहाल किए जा रहे दो टेस्ट
ओपीडी में आए मरीजों में से संदिग्ध मरीजों के दो टेस्ट किए जा रहे हैं। पहले उसका एन्फ्लुएंजा ए का टेस्ट किया जाता है। वह पॉजिटिव आने के बाद उसका एच1एन1 का टेस्ट किया जाता है। अगर किसी मरीज का यह टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उसे एच3एन2 का निगेटिव मान लिया जाता है। अगर कोई मरीज एच1एन1 निगेटिव आता है तो फिर उसका एच3एन2 का टेस्ट लगाया जाता है। फिलहाल दो टेस्ट करने पड़ रहे हैं। अभी तक ऐसी कोई किट अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में नहीं है, जिससे एक ही टेस्ट में इसकी पुष्टि हो सके। वहीं, स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले में जल्द ही किटों की खरीद को लेकर गाइडलाइन जारी करने की तैयारी में है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि जल्द ही किटों की कमी दूर हो जाएगी। इसके लिए तमाम तैयारियां कर ली हैं।
डरने की जरूरत नहीं, हर स्थिति से निपटने को तैयार: विज
इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है। सभी अस्पतालों में फ्लू ओपीडी का आदेश दिया है। जांच से लेकर इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यालय से लगातार जिलों में निगरानी रखी जा रही है। लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। प्रोटोकॉल के तहत सावधानी बरतें।