बैडमिंटन कोर्ट पर अपने खेल के दम पर तहलका मचाने वाली हिसार की बेटी साइना नेहवाल ने अपना खेल करियर जूडो से शुरू किया था। हालांकि साइना ने सिर्फ पांच-छह महीने ही जूडो की ट्रेनिंग ली।
इसके बाद एक कोच के कहने पर उसके पिता डॉ. हरवीर सिंह ने साइना के हाथों में बैडमिंटन रैकेट थमा दिया। तब से लेकर आज तक साइना ने इस खेल में खुद को बेहतर से और बेहतर साबित करके दिखाया है।
तेलुगु सिखाने के मकसद से शुरू कराया खेल
डॉ. हरवीर सिंह के मुताबिक जब वो हैदराबाद में शिफ्ट हुए, तो साइना को यहां की भाषा तेलुगू नहीं आ रही थी। उन्होंने सोचा भाषा न सीख सके, कम से कम यहां के लोगों के हाव-भाव को सीख जाए। इस मकसद से उन्होंने साइना को जूडो खेल में डाल दिया। इस दौरान उन्हें एक बैडमिंटन कोच मिल गया।
कोच के कहने पर उन्होंने साइना के हाथों में बैडमिंटन रैकेट थमा दिया। साइना ने थोड़े समय में ही अंडर-10 आयुवर्ग की राज्यस्तरीय चैंपिययनशिप जीत ली। इसके बाद 11 साल की उम्र में उसे एक फेलोशिप मिल गई। 2006 में कॉमनवेल्थ खेल में एक खिलाड़ी के बीमार होने से उसे जाने का मौका मिल गया और उसने इस खेल में कांस्य पदक हासिल किया।
फिर 2012 में लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त किया। हरवीर सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि वह वर्ल्ड की नंबर एक खिलाड़ी बनेगी।
मेडिकल लाइन दिलाना चाहते थे साइना को
उनके पिता ने बताया कि उन्होंने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं था कि साइना खेलों में अपना करियर बनाएगी। वह तो साइना को मेडिकल स्ट्रीम दिलाना चाहते थे।
साइना की बड़ी बहन को भी उन्होंने फार्मासिस्ट का कोर्स कराया था। मगर जब उन्होंने देखा कि वह बैडमिंटन में बढ़िया प्रदर्शन कर रही है, तो उन्होंने अपना इरादा बदल लिया।
आने लगे साइना के लिए रिश्ते
डॉ. हरबीर के मुताबिक अब साइना के लिए रिश्ते भी आने लगे हैं। मगर उन्होंने यह फैसला साइना पर ही छोड़ा हुआ है। अगर वो अपने जीवनसाथी को खुद फाइनल करती है, तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। वैसे अभी वो अपने करियर पर ही कंसंट्रेट कर रही है।
'हिसार की आती है काफी याद'
विश्व की नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी सायन नेहवाल के पिता डॉ. हरवीर सिंह ने बताया कि वह 26 साल तक हिसार में रहे। उन्होंने एचएयू में एमएससी व पीएचडी की पढ़ाई पूरी की और बाद में जॉब भी यहीं की।
जब उन्होंने 1998 में हिसार छोड़ा, तो उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह आगे की जिंदगी हैदराबाद में बिताने वाले हैं। उन्होंने सोचा था कि दो तीन साल बाद वो फिर हिसार या हरियाणा में आ जाएंगे। डॉ. हरवीर के मुताबिक उन्हें जब भी समय मिलता है, तो इंटरनेट पर हिसार व एचएयू के बारे में पढ़ते हैं।
वह आखिर बार वर्ष 2007 में किसी काम से हिसार आए थे। डॉ. हरवीर ने बताया कि साइना पहले तो हिसार को काफी मिस करती थी। मगर अब वह काफी बिजी हो गई है। उन्होंने बताया कि उनका सेक्टर 15 में खुद का मकान भी था, जिसे वो बेचकर हैदराबाद गए थे।