चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस की काउंसलिंग के दौरान एक उम्मीदवार को मेडिकल बोर्ड ने अयोग्य घोषित कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ उम्मीदवार हाईकोर्ट चला गया। याचिका व साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याची के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कॉलेज प्रशासन को उसे एमबीबीएस में दाखिला देने का निर्देश दिया है। साथ ही योग्य उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किए जाने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मामले पर जांच कमेटी बनाने को कहा है।
कोर्ट के आदेश को मानते हुए स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को निर्देश जारी कर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। मामला जीवन कुमार नामक छात्र का है, जिन्होंने 2021 की नीट परीक्षा में पीडब्ल्यू कैटेगरी में 230 अंक प्राप्त किए थे। उनके पास पीजीआई द्वारा जारी सर्टिफिकेट भी था, जिसमें आंखों की रोशनी कम होने के कारण उनको 40 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग होने की पुष्टि की गई थी लेकिन दाखिले के दौरान जीएमसीएच-32 के मेडिकल बोर्ड ने उन्हें गलत ठहराते हुए दोबारा परीक्षण करवाने का आदेश दिया था।
अभ्यर्थी ने मेडिकल बोर्ड के आदेश को मानते हुए दोबारा 2022 में पीजीआई में ही परीक्षण करवाया। इस बार भी पीजीआई ने उन्हें 40 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग माना और रिपोर्ट दी लेकिन कॉलेज के बोर्ड ने उसे भी गलत ठहराते हुए पीजीआई में जिस मशीन से जांच की गई थी उसे जीएमसीएच-32 में मंगवा लिया। जीएमसीएच-32 में तीसरी बार किए गए परीक्षण में पीजीआई की रिपोर्ट सही साबित हुई लेकिन यह सारी प्रक्रिया पूरी होने के दौरान काउंसलिंग की डेट समाप्त हो चुकी थी।
मामला कोर्ट में जाने पर इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने जीएमसीएच-32 प्रशासन को जवाबदेह ठहराते हुए जीवन कुमार को दाखिला देने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि इसके लिए कॉलेज की बोर्ड सेंट्रल मेडिकल काउंसिल से बात करके एक सीट बढ़ाकर दाखिला देने की अनुमति प्राप्त करें या अगले वर्ष की काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान जीवन कुमार के लिए एक सीट रिजर्व रखें।