मलूका ने कहा कि जागीर कौर पिछले कुछ महीनों से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थीं और अकाली दल के विरोधी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा और सुरजीत सिंह रखड़ा के साथ तीन घंटे की लंबी बैठक में जागीर कौर को सलाह देने की पूरी कोशिश की गई थी।
इससे पहले पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी उनसे मिले थे लेकिन वह एसजीपीसी का चुनाव लड़ने पर अड़ी रहीं। अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी को एसजीपीसी सदस्यों से भी शिकायतें मिली थीं कि जागीर कौर उन पर एसजीपीसी अध्यक्ष के चुनाव में समर्थन करने का दबाव बना रही हैं।
एसजीपीसी चुनाव में लिफाफा कल्चर खत्म होना चाहिए: जागीर कौर
पार्टी से निलंबन के बाद बीबी जागीर कौर पार्टी के खिलाफ खुलकर सामने आ गईं। उन्होंने कहा कि अब यह बात आम लोगों तक पहुंच चुकी है कि एसजीपीसी के अध्यक्ष के नाम का एलान बादलों द्वारा एक लिफाफा खोलकर किया जाता है। पार्टी की एक बैठक होती है, जहां एक नेता बादलों द्वारा रखे गए लिफाफे को खोलता है और उसमें जिस नाम की पर्ची निकलती है, उसे एसजीपीसी का अध्यक्ष बना दिया जाता है। यह कल्चर खत्म होना चाहिए।
सर्वोच्च धार्मिक संस्था के लिए प्रधान का चुनाव सर्वसम्मति से होना चाहिए। शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल से मुलाकात के बारे में जागीर कौर ने कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से भी यही आग्रह किया था कि जो भी चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें अवसर दिया जाए। वे नहीं जानती कि पार्टी अध्यक्ष ने उनकी इस राय को किस ढंग से लिया है, जिसका नतीजा निलंबन के तौर पर सामने आया है। बीबी जागीर कौर ने कहा कि बादलों ने ही उन्हें यह अवसर प्रदान किया था और वह इसके लिए उनकी आभारी भी हैं।