केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर के इस्तीफे के बाद शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अपना नाता तोड़ लिया है। शिअद की कोर कमेटी की शनिवार को तीन घंटे चली बैठक में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने यह एलान किया।
पंजाब में शिअद और भाजपा का गठजोड़ है। कृषि संबंधी विधेयकों के लोकसभा में आने के बाद से ही अकाली दल लगातार किसानों और विरोधियों के निशाने पर है। इस पर अकाली दल ने हरसिमरत कौर का इस्तीफा दिलाकर खुद को केंद्रीय मंत्रिमंडल से अलग किया। हालांकि शिअद ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन देना जारी रखा।
शिअद का मानना था कि इससे बात बन जाएगी और पंजाब का सबसे बड़ा वोट बैंक यानी किसान उससे दूर नहीं जाएगा। लेकिन पंजाब बंद के दौरान किसानों ने अकालियों से दूरी बनाए रखी। इसके अलावा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी शिअद के केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन देने को मुद्दा बनाते हुए उसे घेरा। इसे देखते हुए अकाली दल ने शनिवार को चंडीगढ़ में पार्टी मुख्यालय में कोर कमेटी की बैठक बुलाई जिसमें एनडीए से रिश्ता तोड़ने की घोषणा की गई।
केंद्र सरकार के कृषि विधेयक घातक हैं। पहले से संकट में घिरे किसान के लिए विनाशकारी हैं। अकाली दल भाजपा का सबसे पुराना सहयोगी रहा है लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा और न ही हमारी पार्टी की बात सुनी।
सुखबीर सिंह बादल, शिअद
यह भाजपा के लिए खुशी की बात है। हमारे कार्यकर्ता पूरी तरह से तैयार हैं। 2022 के चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।
अश्वनी शर्मा, अध्यक्ष, भाजपा, पंजाब
एनडीए छोड़ने का फैसला बादलों के लिए राजसी मजबूरी से बढ़कर और कुछ नहीं है। इसमें कोई बी नैतिकता शामिल नहीं है। कृषि विधेयकों पर भाजपा द्वारा आरोप मढ़े जाने के बाद एनडीए छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था।
कैप्टन अमरिंदर सिंह, मुख्यमंत्री, पंजाब।