बादल ने कहा कि बाजपुर तहसील के 20 गांवों में बसे हजारों लोगों की 4805 एकड़ जमीन पिछले 50 सालों से हस्तांतणीय अधिकारों के साथ भूमिदारों के रूप में दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्रों के अलावा इस क्षेत्र में फैक्टरियां, बाजार, आवासीय कालोनियां और स्कूल स्थित थे, जिन्हें अगस्त 1920 से 2013 तब क्राउन ग्रांट एक्ट 1895 के तहत पट्टे पर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इस तथ्य के बावजूद यह मामला अभी अदालत में है। उधम सिंह नगर के जिला मजिस्ट्रेट ने उक्त जमीन की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगाने के अलावा जमीन मालिकों को सीलिंग नोटिस जारी किए थे। उन्होंने कहा कि जमीन मालिकों ने पिछले महीने उनसे संपर्क किया था, इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अब किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और उनके खिलाफ जारी सभी मनमाने आदेश वापस लिए जाएंगे।