गांव बनी बदरपुर पर कब्जा करने वालों एचएसजीएमसी पदाधिकारी या फिर सदस्य नहीं थे, बल्कि इसे अंजाम देने वालों में गांव लोहारा की अलग कमेटी समर्थक संगत शामिल रही।
हरियाणा की हुडडा सरकार ने जैसे ही एचएसजीपीसी को मान्यता दी वैसे ही यह कमेटी हरकत में आ गई और हरियाणा के जिला कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारों से एसजीपीसी के ग्रंथियों को वहां से निकाल अपने ग्रंथी आदि बैठाने शुरु कर दिए और अपना पूरा कब्जा इस गुरुद्वारा पर शांति पूवर्क कर लिया। इसके अलावा गांव बणी-बदरपुर गुरुद्वारा साहिब पर भी गांव लोहारा की अलग कमेटी समर्थक सिख संगत ने कब्जा कर लिया था।
ड्योढी साहेब और बनी बदरपुर के गुरुद्वारों पर कब्जा
हरियाणा से बड़ी खबर आ रही है। यहां एसजीपीसी ने ड्योढी साहेब और बनी बदरपुर गुरुद्वारों पर वापस कब्जा ले लिया है। बीते दिन ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा नौंवी पातशाही गुरुतेग बहादुर साहेब डयोढी साहेब गांव डुढी और गांव बनी बदरपुर पर अपना कब्जा लिया था। आज मौके पर भारी तादात में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
सिखों का 4 गरुद्वारों पर कब्जा, जानिए कौन-कौन से
हरियाणा के गुरुद्वारों पर कब्जे के लिए लड़ रही एचएसजीएमसी ने 4 गुरुद्वारों पर अपना कब्जा जमा लिया।
कुरुक्षेत्र: पुलिस ने सिखों को दौड़ाकर पीटा
कुरुक्षेत्र में गुरुद्वारे पर कब्जे से रोकने पर एचएसजीएमसी समर्थकों और पुलिस में जमकर लाठियां चलीं।
झींडा बोले, शांति भंग नहीं होने देंगे
एचएसजीएमसी के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने मार्चा स्थल पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी भी कीमत पर शांति भंग नहीं करेंगे।
उन्होंने पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ लेने के लिए खून खराबा करने और सिख संगत को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। झींडा ने कहा कि सरकार अलग कमेटी का कानून बना चुकी है। अब इसे कोई भी सरकार आए, खत्म नहीं कर सकती।
बैरिकेड तोड़ पुलिस के बीच भिड़े समर्थक
डीएसपी गौतम प्रदर्शनकारियों के बीच में पहुंचे और उनसे बातचीत की। इस बीच एचएसजीएमसी युवा विंग के प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में करनाल से 100 युवाओं का जत्था कारसेवा डेरा चरणसिंह से पैदल मार्च करते हुए मोर्चा स्थल पर पहुंचा।
यहां पहुंचते ही उन्होंने बैरिकेड तोड़ डाले और कई युवा पुलिस के बीच भिड़ गए। एसएचजीएमसी के युवा विंग ने चार दिन पहले ही ऐलान किया था कि वे 5 अगस्त को कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारों के प्रबंध अपने हाथ में लेंगे।
उधर, गुरुद्वारे में मौजूद एसजीपीसी अमृतसर के समर्थक भी मंगलवार को बड़ी संख्या में हथियारबंद सिख जत्थे गुरुद्वारे में मुस्तैद दिखे।
गुरुद्वारे की ओर बढ़ने की कोशिश, पुलिस ने रोका
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हरियाणा में गुरुद्वारों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की योजना के तहत बीते चार दिन से ऐतिहासिक छठी पातशाही गुरुवारे के बाहर मोर्चा संभाल रहे एचएसजीएमसी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को फिर गुरुद्वारे की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिया लेकिन भारी पुलिस बल के आगे उनकी नहीं चली।
इस दौरान एचएसजीएमसी समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी तकरार भी हुई। तनाव के ऐसे माहौल में डीसी निखिल गजराज और एसपी अश्विनी शैणवी, डीएसपी सतीश गौतम, थाना सिटी के प्रभारी हरभजन सिंह, एसआई वेद प्रकाश और रामकुमार चार पुलिस अधिकारियों ने समर्थकों को आगे बढ़ने से रोका।
एसजीपीसी अन्याय कर रही है : झींडा
यमुनानगर में सोमवार शाम को ही एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कमेटी के पदाधिकारी जोगा सिंह के निवास पर प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने कहा कि एसजीपीसी हरियाणा के सिखों से अन्याय कर रही है।
यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे ही रहे तो आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान तल्खी और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि वे मंगलवार को हरियाणा के राज्यपाल से मिलेंगे।
इस मौके पर मौजूद दीदार सिंह नलवी ने आरोप लगाया कि एसजीपीसी से जुड़े लोग हरियाणा के गुरुद्वारों की गुल्लक पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
विवाद सुलझाने को बैठक में जुटे सभी पक्ष
यमुनानगर में सोमवार शाम एसजीपीसी के पूर्व प्रधान अमरजीत सिंह मंगी के निवास पर एसजीपीसी की ओर से अलग कमेटी के विवाद का शांतिपूर्ण हल ढूंढने के लिए बैठक बुलाई गई।
इस बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़, शिअद के महासचिव सुखदेव सिंह ढिंढसा, महासचिव बलविंदर सिंह भुंडड़ और प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के अलावा शिअद की ओर से डा. दलजीत सिंह चीमा और दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की ओर से परमजीत सिंह सरना व हरविंदर सिंह सरना और एचएसजीएमसी की ओर से भूपिंदर सिंह असंध, जोगा सिंह, हरपाल सिंह पाली ने हिस्सा लिया।
बैठक में तय किया गया कि अलग कमेटी के विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत हल ढूंढने के लिए पांच सिखों की एक कमेटी का गठन किया जाए।