एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब एंड सिंध बैंक के एमडी और सीईओ के रूप में गैर सिख की नियुक्ति पर ऐतराज जताया है। हाल ही में भारत सरकार ने स्वरूप कुमार साहा को इस पद पर तैनात किया है। एसजीपीसी के प्रधान धामी ने कहा कि 1908 में पंजाब एंड सिंध बैंक की स्थापना सिखों के एक स्वतंत्र बैंक के रूप में हुई थी और चीफ खालसा दीवान के साथ संबंधित सिख बुद्धिजीवियों की ओर से लिया गया यह फैसला सिख कौम के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि पंजाब एंड सिंध बैंक को एक सिख बैंक के रूप में जाना जाता है और इसके सबसे ऊंचे पद पर एक सिख को ही तैनात किया जाना चाहिए। इस संबंध में बैंक के नेशनलाइजेशन के अवसर पर सहमति बनी थी लेकिन दुख की बात है कि ऐसा नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि स्वरूप कुमार साहा की नियुक्ति से पहले भी सिख रिवायतों का पालन नहीं किया गया था, अब फिर ऐसा किया गया है।
हरजिंदर धामी ने कहा कि इस बैंक की स्थापना के पीछे सिख शख्सियतों की सोच और इसके नेशनलाइजेशन के समय पर बनी राय को दरकिनार करना ठीक नहीं और बैंक के सबसे ऊपरी पद पर सिख को ही लगाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि सिख बैंक के रूप में पहचाने जाने वाले पंजाब एंड सिंध बैंक के एमडी और सीईओ के तौर पर सिख की नियुक्ति करने की तरफ ध्यान दें, ताकि इस बैंक की स्थापना के साथ जुड़ी रिवायतों की लगातार बरकरार रह सके।