पंजाब के सरकारी व निजी थर्मल प्लांटों की सात यूनिट बंद होने से करीब 1900 मेगावाट बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। गोइंदवाल व तलवंडी साबो की एक-एक यूनिट कोयले की कमी से बंद हो गई है। इसके साथ ही लहरा मुहब्बत की तीन यूनिट पानी की कमी तो रोपड़ में तकनीकी खराबी के चलते दो यूनिट बंद पड़ी हैं।
पंजाब में बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम बाहर से महंगी बिजली खरीद रहा है। मंगलवार को भी पंजाब में बिजली की मांग सुबह करीब 11 बजे सबसे अधिक 7700 मेगावाट दर्ज की गई। थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट जस का तस है। उच्चाधिकारी लगातार दावे कर रहे हैं कि धान सीजन से पहले कोयले का प्रबंध कर लिया जाएगा।
वर्तमान में सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में 17 दिन, लहरा मुहब्बत में 19, तलवंडी साबो में मात्र डेढ़ दिन, गोइंदवाल साहिब में दो और राजपुरा में सात दिन का कोयला शेष है। कोयले के संकट को देखते हुए ही तलवंडी साबो व गोइंदवाल साहिब ने अपनी एक-एक यूनिट को बंद कर दिया है। तलवंडी साबो की एक ही यूनिट 660 मेगावाट की है। रोपड़ की दो यूनिट मरम्मत के चलते और लहरा मुहब्बत की तीन यूनिट पानी की कमी कारण बंद हैं।
सात यूनिट बंद पड़ने से करीब 1900 मेगावाट की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। इस समय पंजाब को सरकारी थर्मल प्लांटों से 570 मेगावाट, निजी से 2530 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्ट, सोलर व नॉन सोलर प्रोजेक्टों को मिलाकर करीब 4000 मेगावाट की आपूर्ति हो रही है। तकरीबन 3700 मेगावाट बिजली बाहर से ली गई है।
130 फीडर दो से छह घंटे तक रहे डाउन
मंगलवार को पंजाब में 130 फीडर दो से छह घंटों के लिए डाउन रहे। 121 फीडर दो घंटे तक डाउन रहे, वहीं एक फीडर दो से चार घंटे और आठ फीडर छह घंटे से ज्यादा डाउन रहे। यह समस्या दिन के समय हुई। पावरकॉम के पास 14 हजार से अधिक शिकायतें पहुंचीं, जिनमें से 9200 के करीब का निपटारा कर दिया गया था। गौरतलब है कि यूक्रेन व रूस के बीच युद्ध के चलते आयात होने वाला कोयला महंगा हो गया है। ऐसे में अब सरकारी के साथ निजी प्लांट भी कोल इंडिया पर निर्भर हो गए हैं। इसका असर कोयले की आपूर्ति पर पड़ा है।