चंडीगढ़। लोन की बकाया राशि जमा करने के लिए बैंक ने सात दिन का समय दिया लेकिन अगले ही दिन ग्राहक का सेविंग अकाउंट फ्रीज कर दिया। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़ ने कोटक महिंद्रा बैंक की सेक्टर-9 शाखा की इस कार्रवाई को सेवा में कमी माना है। आयोग ने बैंक को शिकायतकर्ता बलदीप सिंह को एक लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए हैं।
बलदीप सिंह बैंक में वर्ष 2007 से 2023 तक कार्यरत रहे और चीफ मैनेजर के पद पर भी रहे। परिवार के साथ कनाडा में बसने के लिए वह 18 दिसंबर 2021 को वहां चले गए थे। उन्होंने 21 दिसंबर को इस्तीफा दिया, जिसे स्वीकार करने के बाद 25 मार्च 2022 को उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया। सिंह ने बैंक से दो पर्सनल लोन लिए थे और क्रेडिट कार्ड भी था। सिंह के अनुसार, दोनों लोन की ईएमआई उनके बैंक खाते से नियमित रूप से कट रही थी। किसी किस्त में डिफॉल्ट नहीं किया था और खाते में ईएमआई के लिए पर्याप्त रकम भी थी।
28 दिसंबर को नोटिस, 29 को खाता फ्रीज
बैंक ने 28 दिसंबर 2021 को दोनों लोन खातों के संबंध में रिकॉल नोटिस जारी कर सात दिन में बकाया राशि जमा करने को कहा। लेकिन अगले ही दिन 29 दिसंबर को उनका सेविंग अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। इससे वह खाते का संचालन नहीं कर सके और ईएमआई के भुगतान की व्यवस्था भी नहीं कर पाए। खाता दोबारा चालू करने की मांग पर भी बैंक ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। बैंक ने आयोग के समक्ष कहा कि सिंह ने लोन की शर्तों का पालन नहीं किया था और उसे रिकवरी की कार्रवाई का अधिकार था। आयोग ने यह तर्क खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि जब बैंक ने खुद सात दिन में बकाया चुकाने का समय दिया था तो अगले ही दिन खाता फ्रीज करने से शिकायतकर्ता को भुगतान की व्यवस्था करने का अवसर ही नहीं मिला। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग-1 का 24 अक्तूबर 2024 का फैसला रद्द करते हुए सिंह की अपील मंजूर कर ली।