चंडीगढ़। आइकॉनिक सप्ताह के तहत बुधवार को टैगोर थिएटर में देश को आजाद कराने में अभूतपूर्व योगदान देने वाले गुमनाम क्रांतिकारियों का जीवन नाटक के माध्यम से दिखाया गया। ‘गुमनाम सितारे-अनसंग हीरोज ऑफ फ्रीडम स्ट्रगल’ में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के कलाकारों ने भूमिका निभाई। इस दौरान कई भावुक दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। थियेटर इन एजुकेशन के सह समन्वयक संदीप चौधरी ने बताया कि इसमें 14 कलाकारों ने 60 से भी अधिक भूमिकाओं को निभाया।
गुमनाम सितारे में ओडिसा के बाजी राउत, गुजरात के उषा मेहता, बंगाल के खुदीराम बोस, तमिलनाडु के वेलू चारियार, उत्तर प्रदेश के अशफाक उल्लां खा, आसाम के कनकलता बरूआ के आजादी के आंदोलन में क्रांतिकारी योगदानों से लोगों को परिचय कराया गया। नाटक का निर्देशन डॉ. सुवर्ण रावत ने किया।
इसमें क्रांतिकारियों का जीवन सफर दिखाया गया। ओडिसा के क्रांतिकारी बाजी राउत की उम्र महज 12 वर्ष थी जब अंग्रेजों ने गोली मारकर उन्हें शहीद कर दिया। खुदीराम बोस को 18 वर्ष पूरा होते ही फांसी पर चढ़ा दिया गया। कनक लता बरुया की उम्र 17 वर्ष की थी, जब वे शहीद हो गईं। इसमें क्रांतिकारियों के बचपन की कहानी को भी दृश्यांकन किया गया कि उन पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ा कि वे भारत की आजादी के दीवाने हो गए। कलाकारों में सोमिता कुंडू, तसब्बर अली, जयंत राभा, मोहित जैन, कंचन, स्वप्ना छेत्री, विवेक कनौजिया, भूमिनाथन, स्निग्धा पॉल, योगेश भट्ट, सागनिक, राजेश्वरी, औंद्रिला, कूपेश ने अलग अलग भूमिका निभाई। कलाकार सहित एनएसडी के 35 लोगों की टीम ने काम किया। इसके लिए सेट, ड्रेस और लाइट एनएसडी से लाया गया।