पंजाब में कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में यह फैसला किया गया था कि वीआइपी ड्यूटी में लगे पुलिस जवानों को वापस बुलाकर उन्हें पुलिस थानों में तैनाती दी जाएगी। लेकिन प्रदेश के विभिन्न डेरा प्रमुखों को लेकर सरकार ने चुप्पी साधे रखी है, जिनकी सुरक्षा में न केवल बड़ी संख्या में जवान तैनात हैं, बल्कि पंजाब में कई डेरा प्रमुख ऐसे भी हैं, जिन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई है।
एक धर्मगुरु को दी गई जेड प्लस सुरक्षा पर हर महीने औसतन बारह लाख रुपए खर्च आ रहा है। कुछ डेरा प्रमुखों को आतंकवाद के समय से ही सुरक्षा दी जा रही है। डेरों को लेकर पुलिस की तरफ से सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि डेरों के प्रमुखों को सुरक्षा की जरूरत है और उन्हें धमकियां मिलती रहती हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा में कटौती नहीं की जा सकती।
डेरों से पहले भी वापस बुलाए गए थे जवान
पिछले साल पंजाब सरकार के आदेश पर राज्य पुलिस ने अपने उच्चाधिकारियों और कई अन्य वीवीआईपीज समेत 257 लोगों की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवानों में से 547 को सूबे में कानून-व्यवस्था के लिए वापस बुला लिया था। आदेश के तहत, जिन 547 जवानों को वापस बुलाया गया है, उनमें तीन प्रमुख डेरों- डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास से 30, डेरा दिव्य ज्योति जागरण संस्थान नूरमहल से 20 और डेरा सचखंड बल्लां से 5 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।
इनके अलावा बड़ी संख्या में पंजाब पुलिस के मौजूदा आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों को दी गई पुलिस सुरक्षा में भी कटौती की गई थी। जिन वीवीआईपीज की सुरक्षा कम की गई थी, उनमें आल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के चेयरमैन मनिंदर सिंह बिट्टा, पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल, लुधियाना में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब-उर-रहमान, कांग्रेस के कई पूर्व विधायक, अकाली दल के कई नेताओं और पूर्व विधायकों, श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार, एसजीपीसी के पूर्व प्रधान भी शामिल थे।
इनके साथ ही भाजपा के कई नेताओं की सुरक्षा में भी कटौती की गई थी। उस समय प्रदेश में आरएसएस और हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं की सुरक्षा में भी कमी की गई थी। इनके साथ ही, राज्य सरकार के कई पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा में भी कटौती की गई है, जिनमें मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार भी शामिल थे।
बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश
त्यौहारों के मद्देनजर बाजारों में इन दिनों भीड़भाड़ के माहौल को देखते हुए पंजाब पुलिस के डीजीपी ने सभी पुलिस कमिश्नरों और एसएसपीज को संबंधित इलाकों को बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, डीजीपी ने एक आदेश जारी कर पंजाब पुलिस के मुलाजिमों की छुट्टियां भी रद कर दी हैं।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा प्रबंधों को लेकर डीजीपी के नए निर्देशों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियारों की सप्लाई के मामले में पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी दीवाली के मौके पर पंजाब में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रही है।
पाकिस्तान द्वारा पंजाब के सीमांत जिलों में ड्रोनों के जरिए हथियार और नशा सप्लाई किए जाने की घटनाएं सामने आने के बाद सभी सीमांत जिलों में तो सुरक्षा प्रबंध कड़े करते हुए इन जिलों को संवेदनशील भी घोषित कर दिया गया है और इनमें सुरक्षा प्रबंधों को लेकर खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया है।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी, पाकिस्तानी साजिश की आशंका को देखते हुए विशेष चौकसी बरती जा रही है। डीजीपी ने सभी पुलिस कमिश्नरों और एसएसपीज ने अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की लगातार समीक्षा करने और उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।