सुखदेव ढींडसा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन अमरिंदर सिंह।
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पंजाब में भारतीय जनता पार्टी, पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के त्रिकोणीय गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग पर इसी सप्ताह फैसला हो जाएगा। टिकट बंटवारे को लेकर पंजाब से दिल्ली तक तीनों दलों के नेता मंथन करने में लगे हैं। अब तक यह तय हुआ है कि शहरी, हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा का सीट प्रतिशत गठबंधन के अन्य दलों की अपेक्षा अधिक रहेगा। इसके अतिरिक्त पीएलसी और शिअद संयुक्त गांव और पंथक बाहुल्य सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतारेंगी।
2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पंजाब की सियासत में लगातार बदलाव हो रहे हैं। कई साल साथ रहने वाले राजनीतिक दल चुनाव में जीत के लिए एक-दूसरे का साथ छोड़ रहे हैं। भाजपा अपने 24 साल पुराने गठबंधन के साथी शिरोमणि अकाली दल (बादल) के बिना पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव सिंह ढींडसा की शिअद संयुक्त के साथ चुनाव लड़ रही है। सभी दलों के नेताओं के बीच गठबंधन का फार्मूला पूरी तरह से तैयार हो चुका है। अब चुनावी रण में उतरने के लिए सिर्फ सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा की जा रही है। पंजाब में पहली बार बने त्रिकोणीय गठबंधन के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है इसलिए जीत का फार्मूला बनाने के लिए हर छोटे बड़े स्तर पर मंथन किया जा रहा है।
जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों को ही टिकट
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो सीट शेयरिंग पर इसी हफ्ते फैसला हो जाएगा और प्रत्याशियों की घोषणाएं शुरू कर दी जाएंगी। शहरी और हिंदु बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा को अधिकतर सीटें मिलना तय माना जा रहा है। माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों में आने वाली ग्रामीण और पंथक सीटों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की पीएलसी और शिअद संयुक्त की अधिक दावेदारी मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त टिकट बंटवारे का एक मापदंड यह भी रखा गया है कि जो विजयी उम्मीदवार होगा टिकट में उसे वरीयता दी जाएगी।
छह सदस्यीय समिति का फैसला अंतिम
सीट शेयरिंग पर मंथन के बाद टिकटों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में भाजपा, कैप्टन अमरिंदर सिंह की लोक कांग्रेस पार्टी व सुखदेव सिंह ढींडसा की शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के सदस्य शामिल हैं। पंजाब के भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार समिति टिकटों को लेकर मंथन करने में जुटी हुई है।
2017 में गांवों से निकली थी जीत की राह
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का रास्ता कैप्टन अमरिंदर सिंह गांवों से लेकर ही आए थे। गांवों में लगभग 40 सीटों पर विजय हासिल कर कैप्टन ने मोदी लहर के बीच पंजाब की सत्ता में 10 साल बाद वापसी कराई थी। शिअद संयुक्त के सुखदेव सिंह ढींडसा की राज्य के पंथक वोट बैंक में अच्छी पकड़ है। बेअदबी के बढ़े मामलों का वह इस चुनाव में खासा फायदा उठाएंगे।
त्रिकोणीय गठबंधन का लाभ प्रत्याशियों को माझा, मालवा और दोआबा में दिखाई देगा। गठबंधन में शामिल सभी दलों का एक एजेंडा है पंजाब का विकास। इसी को लेकर भाजपा, पीएलसी और शिअद संयुक्त के सभी प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे। इसके चुनाव में अच्छे परिणाम सामने आएंगे। - जीवन गुप्ता, महामंत्री, पंजाब भाजपा