पॉजिटिव एनर्जी से थे भरपूर, हरियाणा से था बहुत प्यार
कोच अनिल धनखड़ ने बताया कि सतीश कौशिक बहुत ही मिलनसार और पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर व्यक्ति थे। 10 दिन पहले फोन पर बात हुई थी, तब भी कह रहे थे कि दिल्ली आकर फोन करेंगे और गांव में घूमने व लोगों से मिलने आएंगे। उन्होंने बताया कि सतीश कौशिक का इतने बड़े स्तर पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़ाव था। कभी फोन नहीं भी उठा पाते तो वापस कॉल जरूर करते और बताते कि किसी वजह से फोन नहीं उठा पाया। अनिल कहते हैं कि सतीश हरियाणवियों से भी विशेष स्नेह रखते थे। उनका यूं अचानक चले जाना बेहद दुखद है। यह देश और प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है।
अनिल धनखड़ और सतीश कौशिक।
ये हैं अनिल धनखड़
कोच अनिल धनखड़ ने 1999 में पंजाब के पटियाला से प्रशिक्षक का कोर्स कर रोहतक के जाट कॉलेज में मुक्केबाजी केंद्र बनाया। संस्थान ने उनको नौकरी दी तो यहीं पर एमफिल तक की पढ़ाई भी की। अनिल ने बताया कि पिता महावीर सिंह ने बैंक से सेवानिवृत्त होने पर 2003 में मायना में अकादमी बनाई। इसमें बच्चों को फ्री में कोचिंग दी, उनके पास न रिंग था न उस समय क्षेत्र में कोई मुक्केबाजी के प्रति रुझान था। इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में मुक्केबाजों को तैयार करने का निर्णय लिया। जिन बच्चों ने उनके पास प्रशिक्षण लिया, उनमें से करीब 50 सरकारी नौकरी पा चुके हैं। प्रसिद्ध बॉक्सर अमित पंघाल और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता मनोज मलिक के कोच भी अनिल ही हैं। उनके प्रशिक्षण में बच्चों ने यूनिवर्सिटी लेवल पर लगातार छह बार ट्रॉफी जीती।