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सरस्वती नदी पर शोध: एक और रिपोर्ट में नया खुलासा

Fri, 22 May 2015 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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सरस्वती के बहाव क्षेत्र मुगलवाली में खुदाई के दौरान जिस जगह पर जल निकला है वह एक नदी का तल (पेलियो चैनल है)। यहां मिले पत्थर, खनिज और रेत हिमालय से बहकर यहां तक पहुंचे हैं।
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यह खुलासा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जियोलॉजी (भू-विज्ञान) विभाग के चेयरमैन प्रो. डॉ. एआर चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में किया है। डॉ. चौधरी ने बताया कि शोध से यह पता चला है कि यह पुरानी नदी का पेलियो चैनल लगभग उसी स्थान पर है, जहां रेवेन्यू रिकॉर्ड के अनुसार सरस्वती नदी बहती थी।

फील्ड स्टडीज से पता चला है कि खुदाई वाले चैनल में मिलने वाले रेत, खनिज और पत्थर नदी में बहकर आए हैं। यहां पाए गए सैडीमेंटरी स्ट्रक्चर जैसे करंट, क्रास बेडिंग, कोर्स सेंड, लाइम स्टोंस, सेंड स्टोंस और सिलटस्टोंस राउंडेट और सब राउंडेड के रूप में उपलब्ध हैं।
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चेयरमैन प्रो. डॉ. एआर चौधरी की रिपोर्ट में खुलासा

क्रास बेडिंग यह दर्शाती है कि जिस नदी से यह रेत, खनिज और पत्थर जमा हुए हैं, वह बहुत वेग से चलती थी। जिस स्थानों पर पानी कम अथवा शांत था, उन स्थानों पर विशलेषण से ज्ञात होता है कि पानी के बहने की दिशा उत्तर में हिमालय से दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर की तरफ थी।

खुदे हुए चैनल की दोनों दीवारों के निरीक्षण में यह पाया गया है कि मोटी रेत, खनिज नीचे की तरफ है और बारीक ऊपर की ओर है। हैवी मिनरल का जो ग्रुप यहां पाया गया, उससे पता चलता है कि यह रेत, खनिज और पत्थर हायर हिमालय से यहां पहुंचे हैं।  

जारी है पानी की जांच
डॉ. चौधरी ने कहा कि लेबोरेटरी जांच में ओएसएल डेटिंग प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। यह कार्य प्रगति पर है। इसके पूर्ण होने पर रेत, खनिज और पत्थर के जमा होने का सन् पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि पेलियो चैनल में मिले पानी के नमूनों की जांच सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड द्वारा की जा रही है।
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