लंबे अंतराल के बाद सियासी खेल फिर दोनों नेताओं को करीब ले आया है। ढींडसा मोखा के मिलन ने साबित कर दिया कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता है। मोखा एसजीपीसी का चुनाव जीत चुके हैं। पिछले करीब एक दशक से कांग्रेस के साथ जुडे़ रहे हैं। इससे पहले मोखा ने 1992 में विधानसभा चुनाव लड़ा था और तब 1681 मतों के अंतर से पूर्व मंत्री भगवान दास अरोड़ा से चुनाव हार गए थे। अकाली दल के टिकट पर वे संगरूर सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं।
जल्द साझा घोषणा पत्र होगा जारी: ढींढसा
पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने कहा कि उनकी पार्टी, भाजपा और पंजाब लोक कांग्रेस के साथ मिलकर साझा चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब की आर्थिक स्थिति को संभालना, बेरोजगारी को दूर करना और जनता के भरोसे को जीतना उनका मुख्य एजेंडा है। गठबंधन के घोषणा पत्र में पूरे होने वाले वादे ही किए जाएंगे।
ढींढसा ने कहा कि केंद्र सरकार से संबंधित मुद्दों को लेकर सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उनकी मांग है कि आचार संहिता के दायरे में नहीं आने वाले मुद्दों पर अभी फैसला लिया जाए। शेष मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा और इनका समाधान बाद में अवश्य करवाया जाएगा।
गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अगले एक या दो दिन में फैसला हो जाएगा। तीनों दल इस बात पर एकमत हैं कि सीटें जीतना उनकी प्राथमिकता है। सीटों के बंटवारे को लेकर कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीमार होने के कारण प्रत्याशियों की घोषणा में देरी हो रही है। कैप्टन के स्वस्थ्य होते ही प्रत्याशियों का एलान हो जाएगा।