यूं ही नहीं लिया अलग लड़ने का फैसला
भाजपा ने अकेले निकाय चुनवों में उतरने का फैसला यूं ही नहीं लिया है, लंबे समय से पार्टी के विधायक इसकी मांग करते आ रहे थे। जब से जजपा कोटे के विभागों में कथित घोटालों के आरोप लगने शुरू हुए, तभी से भाजपा विधायकों ने पार्टी की बैठकों में सरकार की छवि पर असर पड़ने का मुद्दा जोरशोर से उठाया। भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा की जीरो टॉलरेंस की नीति है। ऐसे में अनेक विधायक सीएम मनोहर लाल, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, संगठन महामंत्री रवींद्र राजू इत्यादि के समक्ष अपनी बात रखते आ रहे थे।
राज्यसभा की दोनों सीटों पर उम्मीदवार की सूरत में जजपा अहम
भाजपा अगर एक ही राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो उसे जजपा विधायकों के साथ की जरूरत नहीं पड़ेगी। भाजपा के 40 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों की ही जरूरत है। दूसरी सीट में उम्मीदवार उतारने की सूरत में 10 जजपा विधायकों, 6 निर्दलीयों, एक हलोपा और कांग्रेस विधायकों में सेंध लगाने की जरूरत पड़ेगी। चूंकि, कांग्रेस में बाहरी उम्मीदवार आने पर कुछ विधायक बगावत की तैयारी में हैं।
अभी जजपा के पंचकूला में दो पार्षद
जजपा के अभी पंचकूला नगर निगम में दो पार्षद हैं। प्रदेश में अन्य नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम में जजपा के जनप्रतिनिधि नहीं हैं। निकाय चुनाव में गठबंधन न रहने का फायदा किसे हुआ, यह 22 जून को नतीजे आने पर साफ हो जाएगा।