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Rajya Sabha Election: पंजाब में पद्मश्री संत सीचेवाल और विक्रमजीत साहनी होंगे आप के उम्मीदवार, सीएम मान ने किया एलान

Sat, 28 May 2022 04:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वातावरण प्रेमी पद्मश्री संत बलबीर सिंह सींचेवाल और पंजाबी कल्चर से संबंधित पद्मश्री विक्रमजीत सिंह साहनी को आप ने राज्यसभा के लिए नामित किया है। सीएम भगवंत मान ने इसकी घोषणा की।
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पद्मश्री विक्रमजीत साहनी और संत बलबीर सीचेवाल। - फोटो : ANI
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी ने दो पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित शख्सियतों को राज्य सभा सदस्य के तौर पर नामित किया है। इनमें वातावरण प्रेमी पद्मश्री संत बलबीर सिंह सींचेवाल और पंजाबी कल्चर से संबंधित पद्मश्री विक्रमजीत सिंह साहनी का नाम शामिल है। सीएम भगवंत मान ने इसकी घोषणा की। शुक्रवार को सीएम भगवंत मान ने शाहकोट के गांव सीचेवाल में संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने संत सीचेवाल के कामों की जमकर तारीफ की थी। इसके बाद से ही संत सीचेवाल के नाम पर मुहर लगने की चर्चाएं शुरू हो गई थी।

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पर्यावरण के रखवाले माने जाते हैं संत सीचेवाल

पंजाब में वर्ष 2000 में कार सेवा शुरू करके संत सीचेवाल ने गुरु नानक देव जी से जुड़ी ऐतिहासिक नदी काली बेई का कायाकल्प करने में विशेष भूमिका निभाई थी। उनके प्रयास से ही औद्योगिक व मानवीय प्रदूषण से जाम 160 किलोमीटर लंबी काली बेई साफ हो पाई थी। आज काली बेई देश में न केवल एक रोल माडल के रुप में देखी जाती है, बल्कि आज वह जगह एक पिकनिक स्थल के रुप में विकसित हो चुकी है। सड़कों वाला बाबा, वेलफेयर बाबा, बेईं वाले बाबा और ईको बाबा से विख्यात संत सीचेवाल ने अपने हाथों से बेईं से कांग्रेस बूटी निकाली थी। शुरुआती दौर में अकेले चलने वाले संत सीचेवाल के प्रयास लोक लहर बन चुके हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय उद्यमी हैं विक्रमजीत सिंह साहनी

विक्रमजीत सिंह साहली, मूल रूप से फरीदकोट जिले के निवासी हैं और इन दिनों उनका परिवार व कारोबार दिल्ली में है। जानकारी के अनुसार विक्रमजीत सिंह साहनी को कोटकपूरा के ढोढा चौक के पास कपड़े की दुकान चलाने वाले गुरचरण सिंह साहनी ने कोई औलाद ना होने की वजह से गोद लिया था और उनकी प्राथमिक शिक्षा कोटकपूरा के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई थी। अस्सी के दशक में उन्होंने फरीदकोट के सरकारी बरजिंदरा कॉलेज के स्नातक की पढ़ाई की थी और उसके बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से एमबीए का कोर्स किया। 

पढ़ाई पूरी करने के बाद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कुछ साल तक कोल इंडिया लिमिटेड में नौकरी की और उसके बाद परिवार के साथ मिलकर दिल्ली में अपना बिजनेस शुरू कर लिया। देखते ही देखते उनके कारोबार ने दिन दोगुणी रात चौगुणी तरक्की करते हुए देश में सन ग्रुप खड़ा कर लिया। 

समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतरीन सेवाओं के चलते उन्हें कई तरह के अवार्ड से नवाजा जा चुका है और भारत सरकार की तरफ से उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। विक्रमजीत सिंह साहनी के कॉलेज अध्यापक रहे प्रो. दलबीर सिंह ने बताया कि विक्रमजीत सिंह साहनी को बचपन से ही गायकी का शौक रहा। 

कॉलेज के समय में भी वह स्टेज की शान रहा और कॉलेज के हर कार्यक्रम में गुरवाणी का पाठ करता था। दिल्ली में कारोबार विकसित करने के साथ-साथ उन्होंने समाजसेवा व धार्मिक गायकी के माध्यम से अपनी अलग पहचान कायम की है। 

प्रो. दलबीर सिंह के अनुसार खालसा पंथ के 300 साला के उपलक्ष्य में सरकारी बरजिंदरा कॉलेज में करवाए गए समारोह में विक्रमजीत सिंह साहनी विशेष रूप से पधारे थे और उन्होंने कॉलेज में एक कंप्यूटर लैब स्थापित करवाने का वादा भी किया था। भले ही विक्रमजीत सिंह साहनी का पिछले कई सालों से फरीदकोट से नाता टूटा हुआ था लेकिन उनके राज्यसभा सांसद नामित होने से फरीदकोट व कोटकपूरा शहर में खुशी की लहर देखी जा रही है।

 

केजरीवाल ने दी बधाई

आम आदमी पार्टी के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल ने संत सीचेवाल और विक्रमजीत साहनी को बधाई दी और कहा कि वे अपने विशाल अनुभव के साथ राज्यसभा की बहस को समृद्ध करेंगे और राज्यसभा में आम आदमी को प्रभावित करने वाले मुद्दों को भी मजबूती से उठाएंगे।
 
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सोमवार को करेंगे नामांकन

आम आदमी पार्टी की ओर से घोषित राज्यसभा  उम्मीदवारों के सोमवार को नामांकन करने की उम्मीद है। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित आप के कुछ मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

तय है जीत

आप के राज्यसभा प्रत्याशियों की जीत तय मानी जा रही है। इसका कारण है विपक्षी दलों के पास विधानसभा में अपने उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। साथ ही आप के दोनों प्रत्याशी पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि साहनी पंजाब में नहीं रहते हैं, लेकिन वह पंजाब और उसकी संस्कृति को बढ़ावा जरूर दे रहे हैं।

इन दलों का पंजाब से समाप्त हुआ प्रतिनिधित्व

इस राज्यसभा चुनाव के साथ ही पंजाब के इतिहास में कांग्रेस और शिअद का उच्च सदन में प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा। 70 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार होगा कि कांग्रेस का पंजाब से उच्च सदन में कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा। वहीं शिअद का 22 सालों में पहली उच्च सदन के लिए कोई उम्मीदार नहीं होगा।
 
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