हरचरण सिंह ने बताया कि 1959 में तिब्बत के साथ भारत की 2500 मील लंबी सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी भारत के पुलिसकर्मियों की थी। तीसरी बटालियन की एक कंपनी को उत्तर पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स एरिया में तैनात किया गया। 20 अक्तूबर को गश्त पर निकली तीसरी टुकड़ी के सदस्य वापस नहीं आए।
इन गुमशुदा पुलिसकर्मियों की तलाश में डीसीआईओ कर्म सिंह की अगुवाई में 20 पुलिसकर्मी 21 अक्तूबर 1959 के दिन सीमा के लिए निकले। दोपहर के समय चीनी सैनिकों ने गोलियां दागनी शुरू कर दीं। कई पुलिस कर्मचारी घायल हो गए। 10 वीर पुलिस कर्मचारी शहीद हो गए जबकि सात बुरी तरह से घायल हो गए थे। कर्म सिंह सहित सातों घायल पुलिस कर्मियों को चीनी सैनिक बंधक बनाकर ले गए और बाद में 13 नवंबर को चीन ने 10 शहीदों के पार्थिव शरीर व 7 बंदी पुलिस कर्मियों को लौटा दिया।
शहीदों की याद में मनाते हैं पुलिस मेमोरियल दिवस
10 शहीद पुलिसकर्मी जिन्होंने चीनी सैनिकों से मुकाबला किया उनकी याद में हर साल पुलिस मेमोरियल दिवस मनाया जाता है और 2 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस कर्मियों के सम्मान में नई दिल्ली में बने नेशनल पुलिस स्मारक को देश को समर्पित किया था।
एसटीएफ में तैनात दीपक धामा ने शहीदों को कुछ यूं याद किया- बस नफा ही तोले दुनिया, मुझे क्या जाने कितने घाटे हैं, मैंने छीन के अपने बच्चों से औरों को बचपन बांटे हैं। होली-दिवाली बस मैं खुद ही, खुद ही हूं ईद-बैशाखी। साधारण कोई वस्त्र नहीं मैं वर्दी हूं खाकी।