चंडीगढ़ जीएमसीएच-32 में मानकों की खुलेआम अनदेखी जारी है। कभी नर्सिंग अफसर भर्ती मामला में फर्जीवाड़ा तो कभी एमडी-एमएस की विवरणिका को लेकर अधूरी जानकारी देने के बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने की बजाय मौन है। अब वहां रजिस्ट्रार के पद पर सेवानिवृत्त कर्मचारी को पिछले तीन वर्षों से तैनाती देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसे लेकर जीएमसीएच-32 प्रशासन कुछ भी कहने से बच रहा है।
केंद्रीय सर्तकता आयोग के मानकों की अनदेखी कर आपत्ति के बावजूद उस कर्मचारी को रजिस्ट्रार के पद पर रिन्यूल दिया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कॉलेज प्रशासन रजिस्ट्रार के एक्सटेंशन और पुनर्नियोजन के मामले से जुड़े आरटीआई का जवाब भी नहीं दे रहा है।
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जीएमसीएच-32 के पूर्व रजिस्ट्रार 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। उस दौरान उन्हें ही पुनर्नियोजन के अंतर्गत रजिस्ट्रार के ही पद पर सेवानिवृत्ति के बाद भी तैनाती दे दी गई। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर पूर्व ज्वॉइंट डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन ने इस पर आपत्ति जताते हुए पद पर एक्सटेंशन देने के मामले पर सवाल खड़ा कर दिया था, लेकिन उस आपत्ति को भी दरकिनार कर पुन: तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया है। जिसे लेकर कॉलेज में चर्चाओं का दौर तेज है।
क्या कहते हैं मानक
जीएमसीएच-32 के ही प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग के अनुसार सरकारी विभाग में किसी भी पब्लिक डिलिंग वाले पद पर तीन साल से ज्यादा समय तक कोई कर्मचारी या अधिकारी तैनात नहीं रह सकता। उसका कार्य पटल परिवर्तन अनिवार्य है। इसके साथ ही पुनर्नियोजन के मानकों के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारी या अधिकारी को पब्लिक डिलिंग वाले पद पर तैनाती नहीं दी जा सकती जबकि यहां इसके उलट किया जा रहा है।
प्रवेश प्रक्रिया का दिया हवाला
पूर्व जेडीए द्वारा रजिस्ट्रार को एक्सटेंशन देने पर जताई गई आपत्ति को एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया का हवाला देकर दरकिनार कर दिया गया है। इससे साफ पता चलता है कि मेडिकल कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया में रजिस्ट्रार का पद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद उस पर तैनाती में मनमानी की जा रही है। इतना ही नहीं एमडीएमएस प्रवेश प्रक्रिया में प्रवेश से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही या मनमानी के कारण विवरणिका में दी गई अधूरी जानकारी ने भी एक नया बवाल शुरू कर दिया है।
मनमानी पर कोई रोक नहीं
कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों का कहना है कि रजिस्ट्रार मनमानी कर रहे हैं। सूचना के आदेश के तहत जो जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए उसके लिए शोषण किया जा रहा है। पिछले दिनों एक एमबीबीएस छात्र को सूचना देने के लिए कई दिनों तक सुबह से शाम तक रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर बैठाने से उसकी स्थिति बिगड़ गई थी जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया था।