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Panjab University: PU को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के खिलाफ प्रस्ताव पास, मान सरकार बोली- यह हमारी विरासत से जुड़ी

Thu, 30 Jun 2022 07:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय इससे दिल्ली, पेशावर, सियालकोट, बहावलपुर, कश्मीर, जम्मू, धर्मशाला, रोहतक व शिमला के 53 कॉलेज जुड़े थे।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : @PunjabGovtIndia
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विस्तार
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पंजाब विधानसभा में गुरुवार को चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों के खिलाफ प्रस्ताव भाजपा के दोनों विधायकों के विरोध के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस प्रस्ताव का सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस, अकाली दल और निर्दलीय सदस्य ने भी समर्थन किया। विधानसभा में पारित यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार के समक्ष उठाने के लिए भेजा जाएगा। विधायकों ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की विरासत है।

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सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए उच्च शिक्षा एवं भाषाएं संबंधी मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देकर पंजाब से छीनने का प्रयास चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब भारत-पाक का विभाजन हुआ तब देश के अन्य राज्यों के लिए भले ही यह दो देशों का गठन था लेकिन 10 लाख पंजाबियों ने इस बंटवारे में अपनी जान गंवाई। केवल जानें ही नहीं गंवाईं, हमारी ऐतिहासिक धरोहरें भी वहां रह गईं और 1882 में लाहौर में बनी पंजाब यूनिवर्सिटी भी वहीं रह गई। 

विभाजन के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी का नया कैंपस होशियारपुर में बनाया गया। बाद में इसे चंडीगढ़ लाया गया। मीत हेयर ने कहा कि 1976 में जब हिमाचल और हरियाणा हिस्सेदारी से पीछे हट गए तब से पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए पंजाब और यूटी पैसा दे रहे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पानी पर पंजाब का हक है। 

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पंजाब के गांवों को उजाड़कर पंजाब यूनिवर्सिटी बनाई गई है, ऐसे में हम इसे केंद्र को कैसे दे दें। केंद्र को पंजाब यूनिवर्सिटी का स्वरूप बदलने नहीं दिया जाएगा। आप विधायक बुधराम ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत का मुद्दा है। उन्होंने इस यूनिवर्सिटी के इतिहास का जिक्र किया और बताया कि देश में अंग्रेजों ने यह चौथी यूनिवर्सिटी बनाई थी। 

इससे पहले 1857 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास में तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई थी। पंजाब यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय इससे दिल्ली, पेशावर, सियालकोट, बहावलपुर, कश्मीर, जम्मू, धर्मशाला, रोहतक व शिमला के 53 कॉलेज जुड़े थे। विभाजन के बाद चंडीगढ़ तक पहुंची इस यूनिवर्सिटी का समृद्ध इतिहास है। इस ऐतिहासिक धरोहर को अब पंजाब से छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा के विधायक जंगीलाल महाजन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया सदन में ऐसा प्रस्ताव लाने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि केंद्र सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव ही नहीं है। हाईकोर्ट में एक प्रोफेसर के केस पर यह मुद्दा उठा है, जिसका पंजाब सरकार की तरफ से जवाब नहीं दिया गया। भाजपा इस बात पर सहमत है कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की है लेकिन इस पर पंजाब सरकार अपना फर्ज नहीं निभा रही। 

भाजपा के अश्विनी शर्मा ने भी कहा कि प्रस्ताव की कोई जरूरत नहीं थी। केंद्र सरकार का केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष मजबूती से नहीं उठाया, जिसके चलते यह विवाद हुआ है। कांग्रेस के सुखपाल खैरा और परगट सिंह ने प्रस्ताव का समर्थन किया। खैरा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब से हथियाना चाहती है, जैसे यूटी चंडीगढ़ के मुलाजिमों को केंद्रीय वेतनमान देकर पंजाब से अलग किया गया है। परगट ने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव पर सरकार के साथ है।

प्रस्ताव में यह कहा गया
प्रस्ताव में कहा गया कि पंजाब यूनिवर्सिटी सूबे की विरासत है और यह पंजाबियों के अस्तित्व का मामला है। सदन कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा किसी न किसी बहाने पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा बदलकर केंद्रीय विश्वविद्यालय करने के प्रयासों से चिंतित है। सदन मानता है कि पंजाब में यह यूनिवर्सिटी एक एक्ट- पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 के साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद फिर शुरू की गई थी और उसके बाद 1966 में पंजाब राज्य के पुनर्गठन के समय संसद द्वारा लागू पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 की धारा 72 (1) के तहत इसे अंतरराज्यीय संस्था घोषित किया गया था। 
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पंजाब के 175 से अधिक कॉलेज, जो फाजिल्का, फिरोजपुर, होशियारपुर, लुधियाना, मोगा, मुक्तसर और एसबीएस नगर जिलों में स्थित हैं, इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हैं। इसका समूचा क्षेत्र और आबादी, मुख्य तौर पर पंजाब में आता है। पंजाब यूनिवर्सिटी ऐतिहासिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक कारणों से पंजाबियों के मन में एक भावनात्मक स्थान रखती है। 

हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने यूनिवर्सिटी को रखरखाव घाटे की ग्रांट में अपना 20-20 फीसदी का हिस्सा देना बंद कर दिया था, तब भी पंजाब राज्य ने अपना हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है और 1976 से लगातार भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा पंजाब के कॉलेजों से इस यूनिवर्सिटी को 100 करोड़ रुपये (यानी कुल 140 करोड़ रुपये) हर साल दिए जा रहे हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी के रूप को बदलने का कोई भी फैसला पंजाब के लोगों को स्वीकार नहीं होगा और इसलिए इस यूनिवर्सिटी के प्रकृति और चरित्र में किसी भी तरह की तबदीली भारत सरकार को नहीं करनी चाहिए। यदि किसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है तो उसे तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाना चाहिए।
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