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स्वतंत्रता दिवस: स्कूल के लड्डू की मिठास... खुद से बनाए झंडे की याद, आज भी कर देती है भावुक

Sun, 15 Aug 2021 10:05 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने कहा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को लाल किले और राजपथ पर होने वाले आयोजन को दूरदर्शन पर पूरा देखती थी। स्वतंत्रता से जुड़े विशेष अवसरों पर स्कूल में होने वाले कार्यक्रम में हमेशा भाग लेती थी। मां कुछ न कुछ स्पेशल पकवान जरूर बनाती थी। पापा स्वतंत्रता से जुड़े किस्से सुनाते थे।
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चंडीगढ़ की प्रमुख हस्तियां। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भागदौड़ भरी जिंदगी ने जश्न-ए-आजादी के उत्सव को भी कहीं न कहीं फीका किया है। वह दौर गुजर गया जब स्कूली बच्चे 15 अगस्त का बेसब्री से इंतजार करते थे। खुद झंडे बनाना, उसे साइकिल पर लगाना और स्कूल में मिलने वाले लड्डू चाव से खाना और ऐसी तमाम चीजें उत्साह से की जाती थीं। 15 अगस्त को लेकर चंडीगढ़ की प्रमुख हस्तियों से बात की गई तो उन्होंने गुजरे दौर को याद करते हुए कहा कि उस दिन को अवकाश की तरह नहीं, उत्सव की तरह मनाते थे। स्कूल में लड्डू और घर में पकवान बनते थे।

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गर्व की बात... जहां कभी परेड की थी आज वहां बच्चों की परेड देखूंगा
स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर शुरू से ही मन में उत्सुकता रहती थी। चंडीगढ़ में कॉलेज के दौरान एनसीसी में भी था। एनसीसी में मुझे सेक्टर-17 के परेड ग्राउंड में होने वाली परेड के लिए चुना गया था। मैंने अपनी टीम के साथ परेड भी की है। इसके बाद 15 अगस्त को दिल्ली में होने वाली परेड में भी शामिल होने के लिए चुना गया था। इस तरह चंडीगढ़ से मेरा लगाव काफी पुराना है। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि जहां कभी परेड की थी, आज वही पर अन्य बच्चों को परेड करते हुए देखूंगा।  - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक

लड्डू खाने और गुब्बारे उड़ाने का बेसब्री से करते थे इंतजार
हम पांचों भाई और दोनों बहनें एक साथ स्कूल जाते थे। दोनों बहन मिलकर हम सभी के लिए एक-एक झंडा बनाती थीं। हम अपनी ड्रेस को लेकर काफी सजग होते थे। एक दिन पहले अपने हाथों से ड्रेस साफ करते थे। सच कहूं तो सबसे ज्यादा इंतजार स्कूल से मिलने वाले लड्डू को खाने और गुब्बारे उड़ाने को लेकर होता था। जिसे हम आज भी याद करते हैं। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई

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देशभक्ति गीत, नाटक में लेती थी भाग

मैं शुरू से ही 15 अगस्त और 26 जनवरी को होने वाले आयोजन में भाग लेती थी। कभी देशभक्ति गीत तो कभी नाटक में प्रस्तुति देती थी। उसके लिए 20 दिन पहले से ही प्रैक्टिस शुरू कर देते थे। घर में सभी एक साथ आजादी का जश्न मनाते थे। हमारी पसंद के पकवान बनते थे। -डॉ. जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच- 32

दोस्तों से पूछते थे कितने लड्डू मिले
स्कूल की परेड में भाग लेते थे। अपने ड्रेस को चमकाने का दौर कई दिन पहले से शुरू हो जाता था ताकि उस दिन हमारी ड्रेस किसी और की ड्रेस से फीकी न नजर आए। स्कूल से मिलने वाले उस लड्डू के आगे तो सभी मिठाइयां फीकी लगती थीं। दोस्तों से पूछते थे कि उसे कितने लड्डू मिले। -कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई

पापा हर बार नई वर्दी लाते थे
हम चारों भाई-बहन स्कूल की परेड में भाग लेते थे। इसलिए पापा हम सबके लिए हर बार नई ड्रेस लाते थे। चमकती ड्रेस पहनकर हम सभी बेहद खुश होते थे। मां उस दिन खासतौर पर हलवा-पूड़ी और पकौड़े बनाती थी। पापा किसान थे, उनके लिए स्वतंत्रता का एक अलग ही मायने था। - डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32

आपस में बांटकर खाते थे लड्डू
पापा हमें 15 अगस्त पर नई ड्रेस लेकर आते थे और उसे पहनकर स्कूल जाते थे। खुद झंडे बनाना, उसे रंगना और फिर अपनी साइकिल पर लगाकर स्कूल जाना एक अलग ही खुशी देता था। हम तीनों भाई बहन स्कूल से मिले लड्डू और फल आपस में बांटकर खाते थे। -डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच- 16
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मोहल्ले में भी जाते थे लड्डू लेने

तिरंगे की झंडियां बनाकर घर और बरामदे में सजाते थे। झंडा लगाकर साइकिल दौड़ करते थे। दोस्तों के साथ पहले स्कूल जाते थे, वहां लड्डू खाते थे। लौटकर ये पता करते थे कि मोहल्ले में और कहां-कहां आयोजन हुए हैं। फिर वहां जाकर भी लड्डू खाते थे। वो दौर वाकई अलग थीं। -डॉ. आरएस बेदी, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार

...सातवें आसमान पर होती थी खुशी
शुरू से ही खेल में रुचि रही है। स्काउट गाइड में हमेशा सहभागिता करते थे। स्वतंत्रता दिवस पर उमस वाली गर्मी में भी परेड करने में कोई परहेज नहीं करते थे। इस दौरान कई बच्चे गिर भी जाते थे लेकिन जज्बा कम नहीं होता था। परिजन सुबह जब परेड देखने आते थे तो खुशी सातवें आसमान पर होती थी। -केके यादव, आयुक्त, नगर निगम

लड्डुओं की अब भी आती है याद
स्वतंत्रता दिवस पर सबसे ज्यादा खुशी लड्डुओं की होती थी। इसके अलावा परेड और भंगड़ा में जरूर सहभागिता करते थे। उस दौरान खुशी होती थी कि परिजन हमारी प्रस्तुति देखने स्कूल आएंगे। पढ़ाई के अलावा सांस्कृतिक गतिविधि देखकर परिजन काफी खुश होते थे। - एनपी शर्मा, जीएम स्मार्ट सिटी व चीफ इंजीनियर निगम
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