मैं शुरू से ही 15 अगस्त और 26 जनवरी को होने वाले आयोजन में भाग लेती थी। कभी देशभक्ति गीत तो कभी नाटक में प्रस्तुति देती थी। उसके लिए 20 दिन पहले से ही प्रैक्टिस शुरू कर देते थे। घर में सभी एक साथ आजादी का जश्न मनाते थे। हमारी पसंद के पकवान बनते थे। -डॉ. जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच- 32
दोस्तों से पूछते थे कितने लड्डू मिले
स्कूल की परेड में भाग लेते थे। अपने ड्रेस को चमकाने का दौर कई दिन पहले से शुरू हो जाता था ताकि उस दिन हमारी ड्रेस किसी और की ड्रेस से फीकी न नजर आए। स्कूल से मिलने वाले उस लड्डू के आगे तो सभी मिठाइयां फीकी लगती थीं। दोस्तों से पूछते थे कि उसे कितने लड्डू मिले। -कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई
पापा हर बार नई वर्दी लाते थे
हम चारों भाई-बहन स्कूल की परेड में भाग लेते थे। इसलिए पापा हम सबके लिए हर बार नई ड्रेस लाते थे। चमकती ड्रेस पहनकर हम सभी बेहद खुश होते थे। मां उस दिन खासतौर पर हलवा-पूड़ी और पकौड़े बनाती थी। पापा किसान थे, उनके लिए स्वतंत्रता का एक अलग ही मायने था। - डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32
आपस में बांटकर खाते थे लड्डू
पापा हमें 15 अगस्त पर नई ड्रेस लेकर आते थे और उसे पहनकर स्कूल जाते थे। खुद झंडे बनाना, उसे रंगना और फिर अपनी साइकिल पर लगाकर स्कूल जाना एक अलग ही खुशी देता था। हम तीनों भाई बहन स्कूल से मिले लड्डू और फल आपस में बांटकर खाते थे। -डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच- 16
तिरंगे की झंडियां बनाकर घर और बरामदे में सजाते थे। झंडा लगाकर साइकिल दौड़ करते थे। दोस्तों के साथ पहले स्कूल जाते थे, वहां लड्डू खाते थे। लौटकर ये पता करते थे कि मोहल्ले में और कहां-कहां आयोजन हुए हैं। फिर वहां जाकर भी लड्डू खाते थे। वो दौर वाकई अलग थीं। -डॉ. आरएस बेदी, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार
...सातवें आसमान पर होती थी खुशी
शुरू से ही खेल में रुचि रही है। स्काउट गाइड में हमेशा सहभागिता करते थे। स्वतंत्रता दिवस पर उमस वाली गर्मी में भी परेड करने में कोई परहेज नहीं करते थे। इस दौरान कई बच्चे गिर भी जाते थे लेकिन जज्बा कम नहीं होता था। परिजन सुबह जब परेड देखने आते थे तो खुशी सातवें आसमान पर होती थी। -केके यादव, आयुक्त, नगर निगम
लड्डुओं की अब भी आती है याद
स्वतंत्रता दिवस पर सबसे ज्यादा खुशी लड्डुओं की होती थी। इसके अलावा परेड और भंगड़ा में जरूर सहभागिता करते थे। उस दौरान खुशी होती थी कि परिजन हमारी प्रस्तुति देखने स्कूल आएंगे। पढ़ाई के अलावा सांस्कृतिक गतिविधि देखकर परिजन काफी खुश होते थे। - एनपी शर्मा, जीएम स्मार्ट सिटी व चीफ इंजीनियर निगम