फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरस्वती नदी का इतिहास जानने को रिमोट सेंसिंग और कार्बन डेटिंग हो इस्तेमाल : डॉ. जीडी बख्शी

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीयू के इतिहास विभाग ने हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के सहयोग से सरस्वती नदी के हाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक खोज पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। मेजर जनरल (डॉ.) जीडी बख्शी ने तर्क दिया कि सरस्वती नदी और सिंध-सरस्वती सभ्यता से संबंधित बारीकियों को देखने और समझने का समय आ गया है। सरस्वती नदी से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए रिमोट सेंसिंग और कार्बन डेटिंग जैसी नवीनतम वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग करने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विज्ञापन

वेबिनार में अतिथियों का स्वागत इतिहास विभाग अध्यक्ष एवं सीनेटर डॉ. प्रियतोष शर्मा ने किया। उन्होंने विभाग के साथ-साथ अतिथियों का परिचय दिया। डीसीडीसी प्रोफेसर अंजू सूरी ने इस समय इस सम्मेलन के आयोजन की प्रासंगिकता साझा की। उन्होंने हाल के दिनों में इतिहास विभाग की ओर से विभिन्न उपलब्धियों और किए गए कार्यों को भी साझा किया।
हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच ने इसका शुभारंभ किया। उन्होंने सरस्वती बोर्ड की विभिन्न चल रही परियोजनाओं और सरस्वती नदी को फिर से जीवंत करने के लिए हिमाचल प्रदेश और हरियाणा राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के महत्व को साझा किया। सरस्वती नदी पर अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. (प्रो.) एआर चौधरी निदेशक ने सरस्वती नदी के संदर्भ में अंत:विषय अध्ययन की भूमिका पर प्रकाश डाला। पीयू वीसी प्रो. राज कुमार ने कहा कि सरस्वती केवल पानी के स्रोत के साथ एक नदी नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता में एक मां के रूप में एक सांस्कृतिक आदर्श है।
विज्ञापन

भारतीय पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रही सरस्वती नदी : मालिनी अवस्थी
पद्मश्री अवार्डी मालिनी अवस्थी ने कहा कि भारतीय भूगोल, दर्शन और प्रदर्शन कला के संदर्भ में सरस्वती नदी भारतीय पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा रही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि एक कलाकार के रूप में वह खुद को मां सरस्वती की रचना मानती हैं। त्रिनिदाद और टोबैगो से भारत में उच्चायुक्त डॉ. रोजर गोपाल ने भी विचार रखे। इस दौरान कई डॉ. एआर वैद्य, संजीव कुमार उपमहानिदेशक जीएसआई, पारु बाल सिद्धू अध्यक्ष प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग पीयू, डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रो. दीप्ति गुप्ता ने भी विचार रखे।
उचित अध्यादेश की आवश्यकता : डॉ. गुप्ता
भाजपा अध्यक्ष हरियाणा ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि उन्होंने सरस्वती नदी की प्रासंगिकता पर बात की। विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षा मंडल के संयुक्त महासचिव उमा शंकर पचौरी ने भी विचार रखे। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एके गुप्ता ने सरस्वती नदी की खोज के लिए उचित अध्यादेश की आवश्यकता और वैज्ञानिक इनपुट पर बात की। समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. रानी मेहता ने सम्मेलन के बारे में बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें