पीजीआई के विशेषज्ञ के मुताबिक, ये दवा आवश्यक श्रेणी में नहीं आती। सिर्फ गंभीर मरीजों को लंग्स इंफेक्शन होने पर दी जाती है। एक मरीज को कुल छह इंजेक्शन देने होते हैं। पहले दिन 200 एमजी की खुराक फिर अगले चार दिन 100-100 एमजी की खुराक लगाई जाती है। यह वायरल के प्रभाव को कम करती है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसकी भारी कमी चल रही है। इंजेक्शन के लिए मरीजों को पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
आपूर्ति में कमी आई है लेकिन चंडीगढ़ में इतनी ज्यादा किल्लत नहीं है। मरीजों के दस्तावेज लेने के बाद उन्हें इंजेक्शन दे रहे हैं। - अंकुर गुप्ता, गुप्ता एजेंसी चंडीगढ़।
दूसरी लहर में रेमडेसिविर की डिमांड बढ़ गई है। हम लोग सिर्फ मरीजों को इंजेक्शन दे रहे हैं। इसके साथ ही मरीज का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। -कुलविंदरजीत सिंह, गुरु नानक मेडिकोज प्राइवेट लिमिटेड।
रेमडेसिविर जरूरी दवाओं में शामिल नहीं है। कुछ गंभीर मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह एक एंटी वायरल ड्रग है, जो वायरल के प्रभाव को कम करने का काम करती है। -प्रो. पंकज मल्होत्रा, इंटरनल मेडिसिन पीजीआई।