वहीं सोमवार को जब श्रद्धालु सचखंड में आए तो उन्होंने अपने रुमाल से ही मुंह ढका हुआ था। महिलाएं अपने दुपट्टे से ही मास्क का काम ले रही थी। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी द्वारा संचालित सभी गुरुद्वारा साहिबान में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है। सरकार द्वारा दी गई सभी हिदायतों के बोर्ड गुरुद्वारा साहिबान के बाहर स्थापित किए गए हैं।
डेरा ब्यास 31 अगस्त तक बंद
केंद्र सरकार द्वारा सभी धार्मिक स्थान व धार्मिक डेरों को खोलने की दी मंजूरी के बावजूद डेरा ब्यास के मुखिया गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने 31 अगस्त तक संगत के डेरे में आने पर पाबंदी लगा दी है। डेरा परिसर में स्थित सभी शेड, जहां प्रवचन होते हैं, सराय और रैन बसेरे 31 अगस्त तक बंद रहेंगे। किसी भी डेरे में प्रवेश करने की आज्ञा नहीं होगी। 31 अगस्त तक सत्संग के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। संगत को घरों में ही रहने की अपील की गई है।
राजपुरा: सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नवाया शीश
550 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर नलास में सोमवार को श्रद्धालुओं ने नियमों का पालन करते हुए माथा टेका। मंदिर प्रशासन ने सभी प्रवेश द्वारों पर सैनिटाइज करने व सोशल डिस्टेंसिग का पालन करने के विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर कमेटी ने कलश परिक्रमा के लिए अलग से शिवलिंग व मंदिर की स्थापना करवाई है। वहीं स्वयं प्रकट होने वाले शिवलिंग मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक सौ से ज्यादा बैरिकेड लगाए गए हैं। मंदिर कमेटी ने सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए दो गज की दूरी बनाए रखने के साथ किसी भी मूर्ति को छूने, शिवलिंग पर दूध व जल चढ़ाने की इजाजत नहीं है।
केंद्र सरकार और पंजाब ने धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति देते हुए ये साफ निर्देश दिए थे कि वहां लंगर और प्रसाद वितरित नहीं होगा। लेकिन धर्मस्थलों के खुलने के पहले दिन ही सोमवार को पंजाब के कई गुरुद्वारों में लंगर और प्रसाद बांटा गया। इनमें सुल्तानपुर लोधी का एतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब भी शामिल रहा।
लंगर-प्रसाद वितरित करने पर मैनेजर जरनैल सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा के अनुसार जो देग चढ़ती है तो वह संगत में बंटती भी है। उन्हें पंजाब सरकार के आदेश तो नहीं पता लेकिन एसजीपीसी की ओर से उन्हें ऐसे कोई निर्देश नहीं है। इसके अलावा अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, श्री फतेहगढ़ साहिब एवं ज्योति स्वरूप साहिब और लुधियाना में गुरुद्वारा श्री दुख निवारण में भी प्रसाद वितरित किया गया।
गुरुघरों में लंगर और कड़ाह प्रसाद पर पाबंदी जायज नहीं: लौंगोवाल
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि लंगर व कड़ाह प्रसाद गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा का अहम अंग है, जिस पर मनाही जायज नहीं है। इस बारे में शिरोमणि कमेटी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है। इसमें कहा गया है कि मनाही के फैसले की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए। इस मौके पर उन्होंने यहां गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब की दर्शनी ड्योढ़ी में थर्मल स्क्रीनिंग की शुरुआत की और साथ ही संगतों को मास्क बांटे।
प्रसाद न बांटने का फैसला केंद्र का, राज्य सरकार जिम्मेदार कैसे: कैप्टन
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेताओं द्वारा धार्मिक मसले पर लोगों को गुमराह करने की कोशिशों की पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर प्रसाद न बांटे जाने संबंधी फैसला केंद्र सरकार का है, जिसका शिअद हिस्सा है। हमारी सरकार ने कभी किसी धर्म के रीति-रिवाजों और प्रथाओं में हस्तक्षेप करने में विश्वास नहीं रखा। लेकिन राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को लागू करने पर विवश है। राज्य सरकार को गुरुद्वारों या अन्य पूजा स्थलों में प्रसाद बांटने पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।
अनुमति के लिए केंद्र से कहें हरसिमरत
कैप्टन ने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते हरसिमरत कौर बादल और उनकी पार्टी ने 8 जून से धार्मिक स्थलों को फिर से खोलने संबंधी एसओपी जारी होने से पहले जरूरी सलाह-मशविरे किए होंगे। हरसिमरत को प्रसाद बांटने की अनुमति देने पर जोर देना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिए थे कि वह गुरुद्वारों में केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लंगर बांटने के जरूरी निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा कि वह खुद प्रधानमंत्री को धार्मिक स्थलों पर प्रसाद बांटने की अनुमति देने के लिए पत्र लिख रहे हैं।
पटियाला: भक्तों का मेन गेट पर तापमान हुआ चेक, सैनिटाइजेशन के बाद मिली एंट्री
पूरे मालवा क्षेत्र में प्रसिद्ध पटियाला के एतिहासिक काली माता मंदिर के कपाट सोमवार को खुल गए। पहले दिन मंदिर में भक्तों का मत्था टेकने के लिए आना-जाना लगा रहा। लेकिन इस दौरान प्रशासन की ओर से कोरोना फैलने से रोकने के लिए पूरे प्रबंध किए हुए थे। मंदिर के प्रमुख एंट्री गेट पर पहले तापमान चेक किया जा रहा था और उसके बाद सैनिटाइजेशन का भी प्रबंध था।
सबसे खास सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए जमीन पर दो-दो मीटर की दूरी पर गोले बनाए गए थे। इन्हीं पर भक्तों को खड़ाकर लाइन से मंदिर में जाने दिया जा रहा था। मंदिर में एक समय केवल 20 श्रद्धालुओं को अंदर जाने की अनुमति दी गई है।
इस मौके पर अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के ओहदेदार राजेश केहर ने बताया कि श्रद्धालुओं को मंदिर में किसी तरह का कोई चढ़ावा नहीं चढ़ाने दिया जा रहा है। जो श्रद्धालु अपने साथ चढ़ावा ला रहे हैं, वह बाहर ही रख लिया जा रहा है। मंदिर में भी पुजारियों द्वारा भक्तों को प्रसाद नहीं दिया जा रहा है। लंगर हाल भी फिलहाल बंद है और जूता घर भी नहीं खोला गया है।
अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के राजेश केहर ने बताया कि कोरोना वायरस के मद्देनजर प्रशासन व सरकार ने फिलहाल प्रसाद की दुकानें खोलने के आदेश जारी नहीं किए हैं। जिससे दुकानदारों में रोष है। मंदिर परिसर के सभी दुकानदारों ने मीटिंग करके रोष जताया है कि पहले ही पिछले 74 दिनों से दुकानें बंद होने से वह आर्थिक मंदी से गुजर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि अब दुकानें खोलने की अनुमति दे। दुकानदारों ने फैसला लिया है कि वह डीसी से मिलकर मांग करेंगे कि कम के कम नारियल, माता की चुनरी वगैरह बेचने की अनुमति दें।
जालंधर: पुष्पमाला और प्रसाद लेकर न आएं श्रद्धालु
लंबे समय से भगवान के दर्शन को तरस रहे भक्तों के लिए आखिर सोमवार को मंदिरों के कपाट खोल दिए गए। सरकार ने कुछ गाइडलाइन के साथ मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थानों को खोलने की इजाजत दे दी है। इसके चलते शहर के तमाम मंदिर पहले की भांति खुले व सभी मंदिरों के प्रबंधकों ने सरकारी गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन भी किया।
जालंधर के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में सुबह 5 बजे से पूजा अर्चना शुरू होने पर मंदिर के बाहर भक्तों का तांता लग गया। श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मंदिर में मां के दर्शन किए। मंदिर में होने वाले इंतजामों के बारे में श्री देवी तालाब मंदिर कमेटी के महासचिव राजेश विज ने कहा कि मंदिर में आने वाले हर भक्त के हाथ सैनिटाइज किए गए व थर्मामीटर से तापमान मापा गया। इसके अलावा किसी भी भक्त को मूर्ति छूने व प्रसाद चढ़ाने की इजाजत नहीं दी गई।
वहीं लक्ष्मी नारायण मंदिर को भी खुलने से पहले सैनिटाइज किया गया। मंदिर में भी सुबह होते ही चहल-पहल शुरू हो गई। मंदिर प्रबंधक कमेटी के प्रधान रविंद्र खुराना ने कहा कि श्रद्धालु के मंदिर में प्रवेश करने से पहले उनके हाथ अच्छे से धुलवाए गए हैं। श्रद्धालुओं को विनम्र निवेदन किया गया कि वह मंदिर में पुष्पमाला और प्रसाद लेकर न आए। मंदिर में किसी भी प्रतिमा को स्पर्श करने की इजाजत नहीं दी गई। इसके अलावा दर्शन करने के दौरान श्रद्धालुओं में सोशल डिस्टेंसिंग का भी खास ध्यान रखा जा रहा है।
लुधियाना: भक्तों ने मंदिर पहुंचते ही कोरोना के खात्मे के लिए की प्रार्थना
कोरोना संक्रमण के चलते सोमवार को 77 दिन के बाद लुधियाना के सभी धार्मिक स्थल खुल गए। सोमवार को सोशल डिस्टेंस से लेकर सैनिटाइजर का सभी जगह पर विशेष प्रबंध रहा। कई जगह पर श्रद्धालुओं का बुखार भी चेक किया गया। ज्यादातर श्रद्धालुओं का कहना था कि उन्होंने यही प्रार्थना की है कि कोरोना संक्रमण को भगवान जल्द खत्म करे। कारोबार फिर से पहले जैसा दौड़े।
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के शुरू होने के बाद सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों पर पाबंदी लगा दी थी। सोमवार से आम लोगों के लिए धार्मिक स्थलों को खोल दिया है। सोमवार सुबह से मंदिर, गुरुद्वारा साहिब में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। चूंकि अभी कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ है, इसलिए धार्मिक स्थलों पर इतनी भीड़ दिखाई नहीं दी। लुधियाना के प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गेट पर हाथ साफ करवाने के लिए सैनिटाइजर का प्रबंध करने के साथ बुखार भी चेक किया गया। मंदिर में प्रसाद, फूल, फल या जल लेकर आने पर पूरी मनाही रही। शहर के गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब में भी सुबह से श्रद्धालु मत्था टेकने के लिए आना शुरू हो गए थे।
मॉल खुले लेकिन कम जुटे लोग
सरकार के फैसले के बाद सोमवार को शहर के सारे मॉल खुल गए। लेकिन ज्यादातर मॉल में लोगों कम ही जुटे। हालांकि मॉल खोलने से पहले प्रबंधकों ने कोरोना संक्रमण को देखते पूरे प्रबंध किए थे। मॉल को रविवार को पूरी तरह से सैनिटाइज किया गया था। किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने से पहले मोबाइल में कोवा एप की जांच की गई। वही थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही लोगों को अंदर भेजा गया।
सोमवार से सतर्कता व सावधानी बरतते हुए शहर के सभी मंदिरों को खोल दिया गया है। मंदिरों में श्रद्धालु मास्क लगाए व सामाजिक दूरी बनाते हुए दर्शन करते नजर आए। वहीं मंदिरों में प्रसाद नहीं बांटा गया। मंदिरों में घंटियों को कपड़ों से बांध दिया गया है, ताकि कोई घंटी भी न बजा सके। श्रद्धालुओं के भगवान की मूर्तियां छूने पर भी रोक है।
शहर के जलालाबाद रोड स्थित संगलावाला अखाड़ा स्थित प्राचीन श्री हनुमान मंदिर व शिवालय के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। टिब्बी साहिब रोड स्थित श्री राम भवन मंदिर में घंटियों पर कपड़ा बांध दिया गया। मंदिर के पुजारी पंडित रणजीत शर्मा ने बताया श्रद्धालुओं को सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया है। साथ ही मूर्तियों को छूने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। इसी तरह श्री रघुनाथ मंदिर, श्री श्याम मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर गीता भवन, शक्ति मंदिर श्री मनन धाम, बाबा कांशी प्रसाद शिव मंदिर, महादेव मंदिर समेत अन्य मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं।
बटाला: गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में संगत हुई नतमस्तक
बटाला के मंदिरों और गुरुद्वारों में संगत देखने को मिली। सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन को लागू किया गया। गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में भी सोमवार की सुबह संगत पहुंची और माथा टेका। शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से संगत के लिए सैनिटाइजर का प्रबंध किया गया था। वहीं संगत ने बैठते वक्त सामाजिक दूरी बनाए रखी।
संगत ने सैनिटाइजर मशीन से हाथों को साफ कर फिर माथा टेका। गुरुद्वारा श्री कंध साहिब के मैनेजर गुरतिंदरपाल सिंह ने बताया कि वह सरकार के इस फैसले की सराहना करते हैं। सोमवार सुबह से ही संगत बिना किसी भय के नतमस्तक हो रही हैं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को लागू किया जा रहा है। संगत में इस बात को लेकर रोष है कि सरकार ने गुरुधामों में प्रसाद और लंगर पर पाबंदी लगाई है। वह सरकार को अपील करते हैं कि इस आदेश पर दोबारा विचार कर इसे वापस लिया जाए।
श्री आनंदपुर साहिब: तख्त श्री केशगढ़ साहिब में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा
सरकार द्वारा धार्मिक स्थानों को खोलने के दिशा-निर्देश के बाद तख्त श्री केशगढ़ साहिब समेत अन्य गुरुद्वारा साहिबान में श्रद्धालुओं की आमद शुरू हो गई है। बेशक कोरोना वायरस को लेकर पंजाब सरकार द्वारा तालाबंदी और कर्फ्यू के दौरान भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा गुरुद्वारा साहिबान खुले थे लेकिन उस समय श्रद्धालुओं की संख्या नाममात्र रही। परंतु पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद धार्मिक स्थल खुलने पर संगत की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
मैनेजर जसवीर सिंह ने बताया कि एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल की हिदायत के अनुसार गुरुद्वारा साहिब के गेट पर सैनिटाइजर लगा दिया गया है। वहीं कर्मचारियों द्वारा श्रद्धालुओं को सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। जगह-जगह पर साबुन और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। गुरुद्वारा साहिब के परिसर को कई बार सैनिटाइज किया जा रहा है। विरासत-ए-खालसा को भी नहीं खोला गया है।