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ढाई लाख उपभोक्ताओं को राहत... इस साल नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम

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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के बिजली विभाग ने महंगाई के इस दौर में शहर के ढाई लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। विभाग ने साल 2022-23 के लिए बिजली के दाम नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इस संबंध में विभाग ने संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) के पास याचिका दाखिल कर कहा है कि वह पिछले कुछ वर्षों से लाभ में है, इसलिए दाम बढ़ाने की जरूरत नहीं है।
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बिजली विभाग ने प्रस्ताव में कहा है कि वर्ष 2022-23 के प्रस्तावित टैरिफ आर्डर में बिजली के दाम में कोई भी बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है और आयोग की तरफ से 30 मार्च 2021 को मंजूर वर्ष 2021-22 के बराबर ही दाम रखने का फैसला लिया है। याचिका में साफ किया गया है कि बिजली विभाग के पास वर्ष 2022-23 के लिए भी 20.54 करोड़ रुपये सरप्लस हैं, इसलिए विभाग अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली के दाम में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं चाहता है।
बीते कुछ साल में बिजली विभाग ने कॉमर्शियल अकाउंट के घाटे को काफी हद तक कम कर लिया है। विभाग के इस फैसले से शहरवासियों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि एक अप्रैल से पानी के दाम ढाई गुना बढ़े हैं और उम्मीद जताई जा रही थी कि बिजली के दाम भी बढ़ सकते हैं क्योंकि प्रशासन ने पिछले कई वर्षों से दाम नहीं बढ़ाए हैं और चंडीगढ़ में बिजली के दाम पड़ोसी राज्यों से काफी कम है।
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बता दें कि चंडीगढ़ में हर साल बिजली के दाम जेईआरसी की ओर से तय किए जाते हैं। विभाग की तरफ से पूरे साल के खर्च और कमाई का ब्योरा बनाकर जेईआरसी को सौंपना होता है। विभाग ही जेईआरसी को सिफारिश करता है कि दाम में बढ़ोतरी की जानी चाहिए या नहीं। इसी तरह साल 2022-23 के लिए विभाग ने दाम नहीं बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है।
तीन साल से नहीं बढ़े बिजली के दाम
शहर में पिछले कई साल से बिजली के दाम नहीं बढ़े हैं। बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अनिल धमीजा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022-23 के टैरिफ प्रपोजल में बिजली के दाम पिछले साल वाले ही रखने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ साल से विभाग फायदे में चल रहा है, जिसके चलते उन्होंने टैरिफ प्रपोजल में बिजली के दाम नहीं बढ़ाए। बता दें विभाग ने वर्ष 2021-22 के लिए बिजली के दाम 9.58 फीसदी कम कर दिए थे। बिजली उपभोक्ताओं से एफपीपीसीए (फ्यूल प्राइस एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्जेज) भी बंद कर दिए गए थे। हालांकि इससे पहले वर्ष 2018-19 में घरेलू कनेक्शन पर हर यूनिट के 20 पैसे और व्यावसायिक पर हर यूनिट के 15 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाए गए थे। पूरे बिल पर 5 फीसदी रेगुलेटरी सरचार्ज अलग से लगाया गया था।
लाभ में है विभाग, फिर भी हो चुका है निजीकरण
चंडीगढ़ के बिजली विभाग का निजीकरण हो चुका है। 175 करोड़ के चंडीगढ़ बिजली विभाग को खरीदने के लिए एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने लगभग 870 करोड़ की बोली लगाई है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है। 24 मार्च 2022 तक विभाग को कंपनी को सौंप देना था लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल और मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचने की वजह से लंबित है। विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। निजीकरण के पीछे केंद्र सरकार का तर्क है कि निजी कंपनी बेहतर सुविधा देगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत यह फैसला लिया गया है। विभाग के कर्मचारियों का मानना है कि लाभ में चल रहे बिजली विभाग के निजीकरण का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। दाम बढ़ भी सकते हैं, क्योंकि पिछले कई साल से शहर में बिजली के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। बता दें कि चंडीगढ़ का अपना कोई बिजली उत्पादन नहीं है, इसलिए विभाग 3.26 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदने में हर साल 640 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तावित टैरिफ:
कैटेगरी फिक्स्ड चार्जेस (रू/केडब्ल्यू/प्रति माह) एनर्जी चार्जेस (रू/केडब्ल्यूएच)
घरेलू
0-150 यूनिट 10 रुपये 2.50 रुपये
151-400 यूनिट 4.25
401 व उससे ऊपर 4.65
घरेलू एचटी 4.30
व्यावसायिक
0-150 यूनिट सिंगल फेज 20 रुपये केडब्ल्यू प्रति महीने सिंगल फेज 4.50
151 से 400 100 रुपये केडब्ल्यू प्रति महीने पर थ्री फेज 4.70
401 व उससे ऊपर 5
0-150 यूनिट थ्री फेज 4.50
151-400 थ्री फेज 4.70
401 व उससे ऊपर थ्री फेज 5
व्यावसायिक 100 रुपये 4.70
उद्योग
बड़े उद्योग 200 4.50
मध्यम उद्योग 200 4.20
लघु उद्योग 30 4.30
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