चंडीगढ़ प्रशासन की लेटलतीफी की वजह से बीते डेढ़ साल से सैकड़ों युवा बेरोजगार हैं। सीटीयू ने जुलाई 2019 में आउटसोर्स पर 250 कंडक्टरों की भर्ती निकाली थी। इसके लिए छह हजार से ज्यादा युवाओं ने परीक्षा दी। जनवरी 2020 में 392 अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी की गई। अब 19 महीने का समय बीत चुका है, लेकिन इन पदों पर भर्ती कब होगी, प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा।
मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थी कई हफ्तों से यूटी प्रशासन के अधिकारियों से मिलने के लिए हरियाणा व अन्य राज्यों से यहां आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी मिलने को भी तैयार नहीं। एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा के लिए 6364 युवाओं ने फॉर्म भरा और सीटीयू ने सभी से 450 रुपये आवेदन फीस व 50 रुपये बैंक फीस के रूप में लिए। इससे सीटीयू को करीब 31.82 लाख रुपये मिले।
परीक्षा के बाद 12 जनवरी 2020 को नतीजे जारी हुए और मेरिट लिस्ट में 392 अभ्यर्थियों ने जगह बनाई। सीटीयू की वेबसाइट पर आज भी मेरिट लिस्ट उपलब्ध है। फरवरी 2020 में कई चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच और मेडिकल भी हुआ, लेकिन इस बीच कोरोना के आने से पूरी प्रक्रिया रुक गई। अब जब सब कुछ सामान्य हो चुका है तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए। इसकी वजह से 392 युवा बेरोजगार होकर घर पर बैठे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वह कभी सीटीयू तो कभी यूटी सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। सीटीयू के अधिकारियों को मेल किया तो कहा गया कि जब सभी बसें चलने लगेंगी तब भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। अब विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे रहे। अभ्यर्थियों की क्या गलती है। नौकरी के इंतजार में वह अन्य परीक्षाओं की भी तैयारी नहीं कर पा रहे।
प्रशासक के सलाहकार समेत कई अधिकारियों को लिखा पत्र
सीटीयू से जवाब नहीं मिलने पर अब अभ्यर्थियों ने प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, परिवहन विभाग के सचिव व डीसी मनदीप सिंह बराड़, निदेशक उमा शंकर गुप्ता व अन्य अधिकारियों को पत्र लिखा है और हरियाणा के विभिन्न जिलों से चंडीगढ़ पहुंचकर दफ्तरों में देकर आए हैं। इनकी मांग है कि रुकी हुई प्रक्रिया को तत्काल शुरू किया जाए और सभी को नियुक्ति दी जाए।
ये भर्ती आउटसोर्स कंपनी की तरफ से की जा रही थी। अब वह कंपनी ही जा चुकी है। कोरोना की वजह से सभी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। अभी तक सभी सीटीयू की बसें नहीं चल पा रही हैं, इसलिए विभाग को कंडक्टरों की जरूरत भी नहीं है। कोरोना की वजह से विभाग को घाटा भी बहुत हुआ है। हालांकि इन युवाओं की मांग जायज है। हमने मना नहीं किया है। अभी इंतजार करने के लिए कहा है। - उमा शंकर गुप्ता, निदेशक, परिवहन विभाग