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चंडीगढ़ में मंदी की मार, फैक्ट्रियों में मशीनें ठप और 13 लाख यूनिट घट गई बिजली की खपत

Wed, 20 Nov 2019 11:31 AM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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मंदी का असर इस कदर हावी है कि इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में पिछले साल के मुकाबले करीब 13 लाख यूनिट बिजली की खपत कम हो गई है। इसके पीछे बड़ा कारण डिमांड में आई कमी है, जिसकी वजह से उत्पादन में भारी कमी आई है। मशीनें बंद पड़ी हैं या फिर क्षमता से काफी कम काम कर रही हैं।
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आलम यह है कि कई उद्योगपति अपना बिजली कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं या लोड कम करा रहे हैं। बिजली विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, अब तक 200 से अधिक उद्योगपति बिजली सरेंडर या लोड कम कराने के लिए आवेदन दे चुके हैं।

बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2018 में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में करीब 1 करोड़ 63 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई थी जबकि सितंबर 2019 में मंदी के असर के चलते बिजली की खपत घटकर होकर 1 करोड़ 50 लाख यूनिट रह गई। इस तरह बिजली की खपत 13 लाख यूनिट घट गई है।
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अगस्त के महीने में भी पिछले साल के मुकाबले बिजली की खपत में 11 लाख यूनिट की कमी आई है। ये आंकड़े अगस्त-सितंबर महीने के हैं और उत्पादन के लिहाज से यह महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यह उस त्योहारी सीजन से पहले का महीना होता है, जब बाजार से बड़ी उम्मीदें बांधी जाती हैं। यह बताता है कि इस बार देश के उद्योग त्योहारी सीजन से बहुत ज्यादा उम्मीदें बांधने की स्थिति में भी नहीं थे।

फास्टनर उद्योग बुरी तरह से प्रभावित

चंडीगढ़ में फास्टनर उद्योग के तहत नट बोल्ट इत्यादि का उत्पादन किया जा रहा है। शहर में ऐसी 300 के करीब फैक्ट्रियां हैं लेकिन आर्थिक सुस्ती के कारण ऑर्डर कम आ रहे हैं। खास कर ऑटो सेक्टर में पिछले करीब एक साल से चल रही सुस्ती का सीधा असर फास्टनर उद्योग पर पड़ा है। परिणाम स्वरूप इंडस्ट्री में उत्पादन 50 फीसद तक घट गया है। चीन से स्क्रू, नट बोल्ट, एंकर फास्टनर, नायलॉक नट इत्यादि उत्पाद बड़ी संख्या में आयात किए जा रहे हैं, जिनका मुकाबला करना भारतीय उद्योगपतियों के लिए काफी मुश्किल है।

बाजार में डिमांड ही नहीं, उद्योग काफी प्रभावित : नवीन मंगलानी
चेंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने बताया कि बाजार में डिमांड ही नहीं है। इसकी वजह से उद्योगों का पहिया थम गया है। ज्यादातर फैक्ट्रियों के पास ऑर्डर काफी कम हैं। लिहाजा, मशीनें नहीं चल रहीं। इससे बिजली की खपत कम हो गई है। बाजार में डिमांड नहीं होने के पीछे नवीन मंगलानी ने बताया कि लोगों ने इस वर्ष पैसे कम खर्च किए हैं। ऐसा क्यों हुआ है, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने कहा, हो सकता है लोग देश की आर्थिक हालात से चिंतित हों और पैसों को इन्वेस्ट कर रहे हों या फिर लोगों ने पास खर्चने के लिए पैसा ही न हो।

आधी मशीनें ही चल रहीं, इसलिए सरेंडर की आधी बिजली
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 के व्यापारी अमरजीत सिंह चावला ने बताया कि पहले काफी काम था इसलिए उन्होंने 75 केवी का कनेक्शन लिया था। पिछले कुछ सालों से काम काफी कम हो गया है। बाजार में डिमांड है नहीं। ऑर्डर कम हो गए हैं इसलिए आधी ही मशीनें चल रही हैं। ऊपर से बिजली के फिक्स चार्जेज तय कर दिए गए हैं इसलिए उन्होंने बिजली कनेक्शन को सरेंडर कर 40 केवी का कराया है।
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व्यापार में आई 40 प्रतिशत तक की कमी

व्यापारी अश्विनी सेतिया ने कहा कि बीते कुछ सालों में उद्योग काफी प्रभावित हुए है। चंडीगढ़ की फैक्ट्रियों की उत्पादन में करीब 35 से 40 प्रतिशत की कमी आई है। बताया कि उनकी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में फैक्ट्री है। काम ज्यादा रहने की वजह से उन्होंने 70 केवी का कनेक्शन लिया था लेकिन अब करीब 40 प्रतिशत काम कम हो गया है। काम न होने की वजह से उन्होंने बिजली का लोड कम करवा कर 19 केवी का कनेक्शन लिया है। यह समय सभी के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

एमएसएमई पर ज्यादा असर पड़ा
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 के व्यापारी सुनील अग्रवाल ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पर ज्यादा असर पड़ा है। फास्टनर उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। जनवरी से बाजार का सुस्त होना शुरू हो गया था। व्यापारी इस उम्मीद में थे कि बाजार इस मंदी से उबरेगा और राहत मिलेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आखिर में खर्चे से तंग आकर उन्होंने भी 97 केवी के कनेक्शन को सरेंडर कर 47 केवी के लिए अप्लाई किया है।

इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में बिजली की खपत
--------------------2019-----------------2018    
अगस्त----------1.42 करोड़ यूनिट----------1.53 करोड़ यूनिट            
सितंबर----------1.50 करोड़ यूनिट----------1.63 करोड़ यूनिट

कुछ व्यापारियों ने बिजली का लोड कम कराया है। इसके पीछे कई कारण हैं। रही बात इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली की खपत के कम होने का तो इसके भी कई फैक्टर हैं, जिनमें से एक यह भी है कि काम नहीं होने की वजह से कई फैक्ट्रियां होटलों के रूप में तब्दील हो चुकी हैं।
- सीडी सांगवान, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, बिजली विभाग

 
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