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कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर, सोनिया का नेताओं को कड़ा निर्देश

Wed, 23 Sep 2015 03:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़
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कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ती जा रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सोनिया गांधी ने नेताओं को सख्त निर्देश दिया है। कांग्रेस आलाकमान का कहना है कि प्रताप सिंह बाजवा और कैप्टन अमरिंदर सिंह संयम बरतें। निर्देश जारी करते हुए पंजाब के प्रभारी कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने कहा कि इस तरह की खींचतान और बयानों की वजह से पार्टी को नुकसान पहुंचता है।
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बाजवा को अयोग्य और विफल नेता करार दिया था। इसके जवाब में बाजवा ने अमरिंदर पर कांग्रेस को तोड़ने और भाजपा में जाने का आरोप लगा दिया। दोनों नेताओं की आपसी खींचतान सामने आने के बाद हाईकमान को मंगलवार को बयान देना पड़ा।

अमरिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कांग्रेस को उबारने की रणनीति पर भी सवाल उठा दिया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि पंजाब में कांग्रेस को नेतृत्व परिवर्तन जल्द करना चाहिए क्योंकि इससे पार्टी को नुकसान पहुंच रहा है। अमरिंदर के बाद बाजवा भी पीछे नहीं रहे।
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उन्होंने कहा कि अमरिंदर अगले साल बैसाखी पर भाजपा के साथ जा सकते है और उनकी योजना कांग्रेस को तोड़ने की है। हाईकमान पंजाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने का फैसला कर चुका है। मगर प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा इसे लेकर असमंजस में है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की करीबी अंबिका सोनी ने कांग्रेस की कमान संभालने से इंकार कर दिया है।
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बाजवा का बयान उनकी निराशा का संकेत

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा की ओर से लगाए गए आरोपों को नकार दिया है। बाजवा ने गत सोमवार को कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह नई पार्टी बनाने जा रहे हैं।

इस पर कैप्टन ने पलटवार करते हुए मंगलवार को कहा कि बाजवा ने जो कुछ कहा है वह राजनीतिक तौर पर विफल व निराश मानसिकता का लक्षण है।

लंदन के लिए करीब एक सप्ताह के निजी दौरे पर रवाना होने से पहले यहां जारी बयान में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि बाजवा को पीपीसीसी अध्यक्ष पद से हटाया जाना तय है। इसलिए वह निराश होकर ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे बाजवा उनके पार्टी बनाने, उसके नाम व तारीख और स्थान के ऐलान को लेकर कल्पना करते हुए मेहनत कर रहे हैं, यदि उतनी मेहनत पार्टी के लिए काम करने में लगाते, तो निश्चित रूप से आज उनका दिमाग शांत होता। बाजवा उन्हें पार्टी से निकलवाने की बातें कर रहे हैं, जबकि वर्कर पहले ही अपना फैसला सुना चुके हैं कि किसे बाहर निकाला जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी रैलियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। जबकि बाजवा की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जनसभाओं के आयोजकों और आम वर्करों ने उनका प्रवेश बंद कर उन्हें नकारना शुरू कर दिया है।
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