हरियाणा पंचायत चुनाव स्थगित हो जाने से जहां नुकसान हुआ, वहां बड़ा फायदा भी हुआ। सबसे बड़ा नुकसान तो सरकार को हुआ। इस कारण से सरकार का ‘शिक्षित ग्राम पंचायत’ का सपना पूरा होना अटक गया है। हालांकि, सरकार अभी तक अपने फैसले पर अडिग है, लेकिन अब इस मामले में सारा दारोमदार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर होगा।
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राज्य विधानसभा में पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2015 के जरिए सरपंच और पंच की शैक्षिक योग्यता तय कर चुकी हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपने फैसले से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन संविधान के तहत इस फैसले को सही ठहराने के लिए सरकार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से इतर प्रदेश सरकार की शिक्षित ग्राम पंचायत की परिकल्पना पर नजर डाली जाए तो साफ है कि विपक्षी दलों के मामूली विरोध के बाद सरकार यह विधेयक पारित कर सकी थी। विपक्षी दलों का जो भी एतराज था, वह इस बात पर था कि गांवों में पहले शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जाए और शिक्षित प्रत्याशी की शर्त को विधानसभा व लोकसभा के स्तर से लागू किया जाए।
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ग्राम पंचायतों में शिक्षित प्रतिनिधि चुने जाने पर प्रदेश सरकार इसलिए भी दबाव बना रही थी, ताकि प्रदेश में केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस जैसी योजनाओं को गांवों में भी लागू किया जा सके।
एक करोड़ से ज्यादा खर्च कर चुकी है सरकार
चुनावी दंगल की तैयारी में जुटा राज्य चुनाव आयोग अब तक की चुनाव प्रक्रिया पर एक करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च कर चुका है। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में जैसे-जैसे देरी होगी, यह खर्च बढ़ता जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्य सरकार की ओर से तय शर्तों के विपरीत आता है तो आयोग की तरफ से खर्च की गई रकम पानी में जाने का अंदेशा है।
सूत्रों के मुताबिक अभी तक राज्य चुनाव आयोग ने पांच लाख नामांकन पत्र छपवाए हैं। तकरीबन 25 हजार ईवीएम राजस्थान से मंगवाई हैं। पोलिंग पार्टियों के लिए ट्रकों की बुकिंग हो चुकी है। पोलिंग पार्टियों के रिहर्सल पर भी सरकार का काफी पैसा खर्च हो चुका है।
आयोग अगर यह ईवीएम अधिक समय तक अपने यहां रखेगा तो उस पर भी केंद्र सरकार को ऐतराज हो सकता है, क्योंकि बिहार में पांच चरण में विधानसभा चुनाव होने बाकी हैं। ईवीएम केंद्र सरकार की संपत्ति है। यदि ईवीएम की कहीं और आवश्यकता पड़ी तो ट्रकों से इन्हें भेजने का खर्च भी चुनाव आयोग के जिम्मे आएगा।
अभी चुनाव प्रक्रिया का पहला चरण था, लिहाजा प्रत्येक दिन के हिसाब से खर्च का आकलन संभव नहीं है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद खर्च का आकलन किया जाता है। -राजीव शर्मा, राज्य चुनाव आयुक्त
चुनाव प्रक्रिया रोकी, आचार संहिता होल्ड
नई शर्तों के साथ चुनाव कराने पर अड़ी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से जोर का झटका लगा है। राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया मंगलवार को रोक दी। इसी फैसले के मद्देनजर आयोग ने प्रदेश भर में लागू चुनाव आचार संहिता को होल्ड कर दिया है। होल्ड का तात्पर्य यह है कि चुनाव से जुड़ी अब कोई नई घोषणा नहीं हो सकती।
इस बारे में विस्तृत विवरण आयोग सरकार से मंथन के बाद स्पष्ट करेगा। पहले चरण के नामांकन पत्रों की छंटनी का काम रोक दिया गया है, वहीं दूसरे चरण के नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया पर भी ब्रेक लगा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक सात सितंबर से जारी चुनाव अधिसूचना के तहत चुनाव की जितनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, उसे रद्द नहीं किया जा रहा, बल्कि स्थगित किया जा रहा है।
आयोग ने कहा सुप्रीम कोर्ट जब इस मामले में अपना फैसला सुना देगी तब आयोग फिर से अधिसूचना जारी कर चुनाव की तिथियों की घोषणा करेगा
क्या कहा कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नए कानून की वैधता को लेकर 7 अक्तूबर से सुनवाई करेंगे। सरकार एक हफ्ते में हलफनामा दाखिल करें।
सरकार का पक्ष अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार ने निर्देश दिया है कि मौजूदा स्थिति में शैक्षणिक योग्यता की शर्त हटाना अनुचित होगा। अगर कोर्ट रोक हटाने को तैयार नहीं है तो योग्यता की वैधता से संबंधित मसले का जल्द से जल्द निपटारा कर दें।
प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं में बाधा बने पंचायत चुनाव के टलने के साथ ही अब तय समय पर इम्तिहान का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हालांकि, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड और सरकार की ओर से अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं आया है, पर माना जा रहा है कि परीक्षा निर्धारित शेड्यूल में हो सकती हैं।
इस उहापोह की स्थिति के बावजूद शिक्षा बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर परीक्षाओं का पूर्ववर्ती शेड्यूल यथावत है। राज्य में पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद 29 सितंबर से आरंभ होने वाली प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। चुनाव में पर्यवेक्षक और पीठासीन अधिकारी के तौर पर शिक्षकों की जिम्मेदारी और स्कूल की इमारत को पोलिंग बूथ के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की परिपाटी को देखते हुए शिक्षा बोर्ड ने भी सरकार से परीक्षाओं के संबंध में निर्देश मांगा।
विकल्प भी मौजूद, पर समय पर होने को आसार एक विकल्प यह भी रखा गया कि प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा न कराकर एक बार मार्च में ही करा ली जाए। चूंकि, अब पंचायत चुनाव टल गए हैं, इसलिए परीक्षाएं तय समय पर होने की आसार हो गए हैं। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सेमेस्टर परीक्षाओं के संबंध में अभी तक सरकार की ओर से कोई हिदायत नहीं आई हैं।
संभवतया अगले एक या दो दिन में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। वैसे बोर्ड प्रशासन की तैयारी लगभग पूरी हैं। 29 सितंबर से परीक्षाएं कराने में बोर्ड को कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उधर, हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव विकास शर्मा का कहना है कि परीक्षाओं के लिए बच्चे मानसिक तौर पूरी तरह से तैयार हैं। इसलिए, निर्धारित समय पर ही परीक्षाएं कराई जानी चाहिए। इसके लिए संगठन सहयोग के लिए तैयार है।